देश के सबसे बड़े निजी बैंक से लोन ग्राहकों को झटका, MCLR बढ़ने से महंगी होगी EMI व्यापार एक महीने पहले 21
देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने 8 जून 2026 से MCLR में 10 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे होम लोन से लेकर पर्सनल लोन तक की EMI महंगी हो सकती है।

देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक ने अपने लाखों कर्जदारों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी MCLR में 10 बेसिस पॉइंट तक की वृद्धि कर दी है। संशोधित ब्याज दरें 8 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं। बैंक का कहना है कि फंड जुटाने की बढ़ती लागत को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जिनके होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़े हुए हैं। दरें बढ़ने के बाद इन ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) महंगी हो सकती है या फिर उनके लोन की अवधि और लंबी खिंच सकती है। हालांकि जिन ग्राहकों के कर्ज आरबीआई के रेपो रेट जैसे किसी बाहरी बेंचमार्क से जुड़े हैं, उन पर इस फैसले का सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

किन-किन अवधियों की MCLR में हुई बढ़ोतरी

एचडीएफसी बैंक ने अधिकांश अवधियों की MCLR में इजाफा किया है। बैंक की ओवरनाइट MCLR 8.05% से बढ़कर 8.10% हो गई है। तीन महीने की दर 8.15% से बढ़कर 8.20% और छह महीने की दर 8.30% से बढ़कर 8.35% पर पहुंच गई है। एक साल की MCLR अब 8.40% हो गई है, जो पहले 8.35% थी।

सबसे बड़ी बढ़ोतरी दो साल की MCLR में की गई है, जो 8.45% से बढ़कर 8.55% हो गई है। वहीं तीन साल की दर 8.60% से बढ़कर 8.65% पर आ गई है। दूसरी ओर, एक महीने की MCLR में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह 8.05% पर ही बनी हुई है।

ग्राहकों की EMI पर कैसा रहेगा असर

MCLR वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिसके आधार पर बैंक कई तरह के कर्ज की ब्याज दर निर्धारित करते हैं। जिन ग्राहकों के पुराने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR से जुड़े हैं, उनकी अगली रीसेट डेट पर नई दरें लागू हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में या तो उनकी EMI बढ़ जाएगी या फिर बैंक किस्त को समान रखते हुए लोन की अवधि को आगे खींच सकता है।

नए कर्ज लेने वाले ग्राहकों को भी अब पहले की तुलना में अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। इसलिए हर ग्राहक को यह जरूर जांच लेना चाहिए कि उसका लोन MCLR से जुड़ा है या किसी बाहरी बेंचमार्क से।

आरबीआई के स्थिर रुख के बावजूद क्यों बढ़ीं दरें

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था। इसके बावजूद बैंक अपनी फंडिंग लागत, जमा पर दिए जाने वाले ब्याज और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर MCLR में फेरबदल कर सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एचडीएफसी बैंक ने मार्च 2026 में कुछ अवधियों की MCLR में 10 बेसिस पॉइंट तक की कटौती की थी। जनवरी और अप्रैल में भी कुछ दरों में कमी की गई थी, लेकिन अब बैंक ने एक बार फिर दरें बढ़ा दी हैं, जिसका असर लाखों कर्जदारों पर पड़ सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन ग्राहकों के लोन MCLR से जुड़े हैं, उन्हें अपनी EMI और लोन की शर्तों की एक बार समीक्षा जरूर कर लेनी चाहिए।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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