बिहार का 400 साल पुराना वन देवी मंदिर: जहां सूर्यास्त के बाद कोई नहीं ठहरता, अब बड़े पर्दे पर दिखेगा रहस्य बिहार 4 घंटे पहले 4
पटना के बिहटा में स्थित करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर की रहस्यमयी लोककथा पर एक फिल्म बनने जा रही है, जो जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

बिहटा के जंगल का रहस्य

बिहार में एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जिसके बारे में प्रचलित किंवदंतियां लोगों को आज भी अचंभित कर देती हैं। पटना जिले के बिहटा इलाके में स्थित वन देवी मंदिर अपनी अद्भुत मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सूर्यास्त के बाद यहां कोई भी व्यक्ति, यहां तक कि मंदिर के पुजारी भी रुकने का साहस नहीं करते हैं। जैसे ही शाम ढलती है और मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं, आसपास के पूरे इलाके और जंगल में सन्नाटा पसर जाता है। स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि अंधेरा होने के बाद इस जंगल में साक्षात देवी का विचरण होता है, जिसकी वजह से लोग रात में वहां जाने से पूरी तरह परहेज करते हैं।

350 से 400 साल पुराना इतिहास

यह मंदिर लगभग 350 से 400 साल पुराना माना जाता है, जिसका निर्माण काल 16वीं सदी के आसपास का बताया जाता है। भौगोलिक दृष्टि से यह मंदिर अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों की सीमा पर स्थित है। राघोपुर के रहने वाले विद्यानंद मिश्र के बारे में ऐसी मान्यता है कि वे विंध्याचल से माता का पिंड लेकर आए थे और उसे इसी स्थान पर स्थापित किया था। आज भी उसी पवित्र पिंड की पूजा की जाती है। इस मंदिर की रहस्यमयी आभा और इसके प्रति लोगों की गहरी आस्था ने अब फिल्म निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' की कहानी

इस अद्भुत लोककथा को अब बड़े पर्दे पर फिल्माया गया है। सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अभिनीत फिल्म 'द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' की पटकथा इसी मंदिर से प्रेरित है। हाल ही में जारी हुए इस फिल्म के टीजर में मंदिर, घने रहस्यमयी जंगल और दैवीय शक्तियों के अंश देखने को मिले हैं। फिल्म के लेखक और टीवीएफ के संस्थापक अरुणाभ कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार इस मंदिर के बारे में सुना और स्थानीय ग्रामीणों तथा पुजारियों से चर्चा की, तो वे इसकी कहानी से काफी प्रभावित हुए। इस विषय पर करीब दो साल पहले उन्होंने निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा से विस्तार से चर्चा की और दोनों ने मिलकर इस पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया।

तकनीक और कला का मेल

निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा का मानना है कि इस प्रकार की लोककथा को स्क्रीन पर जीवंत करना एक बड़ी चुनौती थी। इसे और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए फिल्म में बेहतरीन एनीमेशन और आधुनिक स्पेशल इफेक्ट्स का भरपूर उपयोग किया गया है। दर्शकों को एक रहस्यमयी दुनिया का अनुभव कराने के लिए तकनीकी टीम ने कड़ी मेहनत की है। इस फिल्म में मुख्य कलाकारों के साथ-साथ सुनील ग्रोवर, मनीष पॉल, अनूप सोनी और अजय राजू जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म के निर्माता इसे एक बड़े प्रोजेक्ट के रूप में देख रहे हैं। 25 सितंबर को यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके बाद दर्शक बिहार की इस अनसुनी और रहस्यमयी कहानी को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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