संसद में संजय झा का बड़ा खुलासा: दुबई के 23 बिजनेसमैन आखिर दिल्ली क्यों आए थे? बिहार एक घंटा पहले 4
राज्यसभा में संजय झा ने छात्र आंदोलन की आड़ में बाहरी ताकतों के दखल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नीट पेपर लीक मामले में मल्लिकार्जुन खरगे के दावों को भी खारिज करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

दिल्ली छात्र आंदोलन पर संजय झा का गंभीर सवाल

राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद संजय कुमार झा ने बेहद गंभीर विषय उठाया है। उन्होंने दिल्ली में हुए हालिया छात्र आंदोलन को लेकर सवाल खड़े किए और दावा किया कि इस प्रदर्शन के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

संजय झा ने सदन को संबोधित करते हुए एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र था कि दुबई से 23 बिजनेसमैन को टिकट देकर खास तौर पर दिल्ली भेजा गया था ताकि वे इस आंदोलन में शामिल हो सकें। सांसद ने तीखे लहजे में सवाल किया कि आखिर नीट पेपर लीक के मामले से इन व्यापारियों का क्या संबंध था? उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों की नाराजगी और उनकी भावनाएं तो जायज थीं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं आंदोलन को किसी अन्य निहित स्वार्थ के लिए प्रभावित करने की कोशिश तो नहीं की गई थी।

मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों का दिया जवाब

सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बयानों का खंडन करते हुए संजय झा ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के मामले में भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि संजीव मुखिया अभी भी बक्सर सेंट्रल जेल में कैद है। झा ने कहा कि उस पर इतने गंभीर मामले दर्ज हैं कि उसके जल्द जेल से बाहर आने की कोई संभावना नहीं दिखती है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि इस संवेदनशील मुद्दे पर गलत सूचनाएं फैलाकर लोगों में भ्रम पैदा करने की राजनीति से दूर रहना चाहिए।

युवाओं का भरोसा ही लोकतंत्र की असली ताकत

संजय झा ने इस बात पर चिंता जताई कि जब कभी प्रश्नपत्र लीक होता है, तो वह केवल परीक्षा की गोपनीयता को ही खंडित नहीं करता, बल्कि पूरे तंत्र के प्रति युवाओं के विश्वास को भी चकनाचूर कर देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इससे अधिक चिंताजनक कुछ नहीं हो सकता कि उसकी अगली पीढ़ी अपनी ही संस्थाओं और व्यवस्था पर भरोसा करना छोड़ दे। इसीलिए, इस कानून को केवल एक कानूनी संशोधन के रूप में नहीं बल्कि करोड़ों युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की सुरक्षा के तौर पर देखा जाना चाहिए।

परीक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई

सांसद ने आगे कहा कि आज के समय में परीक्षा माफिया एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहे हैं। ये लोग अत्याधुनिक तकनीक और धनबल के दम पर युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इन अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना संसद की प्राथमिक जिम्मेदारी है और यह नया संशोधन विधेयक उसी दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने सभी सांसदों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करने की अपील की ताकि देश के युवाओं को सकारात्मक संदेश दिया जा सके।

हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का महत्व

परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए संजय झा ने केंद्र सरकार के हालिया फैसलों की सराहना की। उन्होंने बताया कि सरकार ने नंदन निलेकणी की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस विशेष समिति में पूर्व ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ जैसे अनुभवी विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं। अंत में, संजय झा ने दोहराया कि जब तक देश की परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं होगी, तब तक देश की प्रगति की नींव कमजोर बनी रहेगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि हमें हर हाल में उन ताकतों को बेनकाब करना होगा जो युवाओं के संघर्षों का इस्तेमाल अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए करती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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