पटना उपद्रव: 500 अज्ञात लोगों पर FIR और 40 हिरासत में, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी प्रशासन की पैनी नजर बिहार एक महीने पहले 44
पटना में नीट परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुए हिंसक हंगामे के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें अब तक 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पटना में उपद्रव के बाद पुलिस का कड़ा रुख

पटना में नीट परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में बुधवार को आयोजित प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद अब पुलिस प्रशासन ने उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदर्शनकारियों द्वारा सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ करने और पुलिस दल पर पथराव करने के बाद स्थिति पूरी तरह से अनियंत्रित हो गई थी। इस पूरे बवाल के बाद राजधानी के प्रमुख थानों में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने कोतवाली, गांधी मैदान और सचिवालय थानों में कुल 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने अब तक कुल 40 संदिग्ध उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

हिंसा का घटनाक्रम और पुलिस की लाठीचार्ज

बुधवार को प्रदर्शनकारी नीट परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। हालांकि, मामला तब बिगड़ गया जब भीड़ ने सुरक्षा घेरे को तोड़कर प्रतिबंधित इलाकों में प्रवेश करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस की गाड़ियों को अपना निशाना बनाया, बल्कि उन पर जमकर पत्थर भी बरसाए। स्थिति को संभालने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अंततः बल प्रयोग करना पड़ा और जमकर लाठीचार्ज की गई। इस लाठीचार्ज के दौरान मची भगदड़ में कई पुलिसकर्मियों के साथ-साथ प्रदर्शनकारी छात्र भी घायल हो गए।

साजिश की गहराई से पड़ताल

पटना के एसएसपी ने माना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के नाम पर कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ में घुसपैठ की थी, जिनका मुख्य उद्देश्य हिंसा फैलाना और कानून व्यवस्था को बाधित करना था। वर्तमान में, पुलिस विभाग द्वारा सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल की वीडियोग्राफी को बारीकी से खंगाला जा रहा है, ताकि वास्तविक उपद्रवियों की पहचान की जा सके। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि हिंसा में शामिल किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानूनी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर प्रशासन की नजर

पुलिस केवल सड़कों पर उतरने वाले प्रदर्शनकारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस उपद्रव को भड़काने के डिजिटल पहलुओं की भी जांच कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि क्या सोशल मीडिया और यूट्यूब के जरिए भीड़ को उकसाया गया था। अफवाह फैलाने और भीड़ को हिंसा के लिए प्रेरित करने के संदेह में कई यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका जांच के दायरे में है। पुलिस का मानना है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर जिस तरह से लोगों को भड़काया गया, वह एक गंभीर साजिश का हिस्सा हो सकता है। आने वाले दिनों में पुलिस उन सभी लोगों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की तैयारी कर रही है जिन्होंने इस बवाल को हवा देने का काम किया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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