बिहार
2 महीने पहले
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भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की बड़ी कार्रवाई
बिहार की राजधानी पटना से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां भ्रष्टाचार के खिलाफ काम कर रहे निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक स्कूल प्रिंसिपल को घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। संपतचक स्थित कन्या उच्च विद्यालय में पदस्थापित प्रधानाध्यापक को यह गिरफ्तारी तब हुई जब वे एक प्रमाण पत्र जारी करने के बदले में 50 हजार रुपये की रिश्वत वसूल रहे थे। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और शिक्षा विभाग के गलियारों में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रमाण पत्र के लिए घूस की मांग
आरोपी प्रधानाध्यापक पर आरोप है कि उन्होंने विद्यालय से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र देने के एवज में पीड़ित से 50 हजार रुपये की मांग की थी। रिश्वतखोरी के इस खेल से परेशान होकर पीड़ित ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पास शिकायत दर्ज कराई। निगरानी विभाग ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया और पूरे मामले का सत्यापन किया। जैसे ही यह पुष्टि हुई कि प्रिंसिपल वास्तव में पैसे की मांग कर रहे हैं, विभाग ने जाल बिछाने की तैयारी पूरी कर ली।
जाल बिछाकर रंगे हाथ पकड़े गए प्रिंसिपल
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक सोची-समझी योजना के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया। जब प्रिंसिपल 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने के लिए तैयार हुए, तभी टीम ने उन्हें मौके पर ही धर दबोचा। रिश्वत की रकम लेते ही अधिकारियों ने प्रिंसिपल को अपने कब्जे में ले लिया, जिससे वे बच नहीं सके। इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्कूल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया और स्थानीय लोगों के बीच भी स्कूल प्रशासन की इस करतूत की चर्चा होने लगी।
पूछताछ और आगे की जांच प्रक्रिया
गिरफ्तारी के तुरंत बाद निगरानी की टीम ने आरोपी प्रधानाध्यापक को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर ले जाकर पूछताछ शुरू की है। जांच अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या प्रिंसिपल इस तरह से पहले भी प्रमाण पत्रों या अन्य सरकारी कार्यों के बदले रिश्वत लेते रहे हैं। इसके साथ ही, निगरानी की टीम स्कूल के दस्तावेजों की गहन छानबीन कर रही है ताकि भ्रष्टाचार के इस जाल की तह तक पहुंचा जा सके।
शिक्षा विभाग में हड़कंप
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद से शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। उच्च पद पर बैठे अधिकारी मामले पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। निगरानी विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुरूप आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्कूलों में भी अब भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि आम लोगों को अपने कार्यों के लिए घूस न देनी पड़े।
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