बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़: नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह की मुलाकात से हलचल बिहार एक महीने पहले 55
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके पूर्व सहयोगी आरसीपी सिंह की मुलाकात ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। क्या यह जेडीयू में आरसीपी सिंह की वापसी का संकेत है, इस पर हर किसी की नजर टिकी है।

नीतीश-आरसीपी की मुलाकात और सियासी मायने

बिहार की राजनीति में शनिवार को एक ऐसी घटना घटी जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी अचंभे में डाल दिया है। कभी जनता दल यूनाइटेड के सबसे ताकतवर रणनीतिकार और नीतीश कुमार के हनुमान कहे जाने वाले आरसीपी सिंह अचानक पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के नए आवास पर उनसे मिलने पहुंचे। वर्षों की कड़वाहट और लंबी दूरी के बाद हुई इस मुलाकात ने बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आरसीपी सिंह ने स्वयं एक्स हैंडल पर अपनी और नीतीश कुमार की तस्वीर साझा की है, जिसने जेडीयू के भीतर और बाहर खलबली मचा दी है।

पुराना नाता और राजनीतिक उत्थान

आरसीपी सिंह का नीतीश कुमार के साथ रिश्ता केवल एक राजनीतिक जुड़ाव भर नहीं था। एक समय था जब आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार के बाद पार्टी में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता था। वे न केवल एक पूर्व आईएएस अधिकारी रहे हैं, बल्कि नीतीश कुमार के शासनकाल के दौरान प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर उनके सबसे विश्वसनीय साथी रहे हैं। पार्टी में उम्मीदवारों के चयन से लेकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और दिल्ली के गलियारों में समन्वय बैठाने तक, आरसीपी सिंह की भूमिका निर्णायक होती थी। उन्हें अक्सर नीतीश कुमार की राजनीतिक आंख और कान के रूप में पहचाना जाता था। उनके बढ़ते कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बनाया गया था।

दूरियों की शुरुआत और विवाद

राजनीति में समीकरण अक्सर बदलते रहते हैं, और नीतीश-आरसीपी के रिश्तों में भी यही हुआ। दोनों के बीच मनमुटाव की नींव तब पड़ी जब जुलाई 2021 में आरसीपी सिंह ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जेडीयू कोटे से अकेले मंत्री पद की शपथ ली। पार्टी के भीतर यह चर्चा जोरों पर थी कि आरसीपी सिंह की निष्ठा जेडीयू के बजाय भाजपा के करीब झुक रही है। राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के उभार और आरसीपी के निर्णयों के बीच पार्टी का आंतरिक संतुलन बिगड़ने लगा था। माना जाता है कि नीतीश कुमार स्वयं भी इस घटनाक्रम से नाखुश थे।

पार्टी से विदाई और कड़वाहट

मंत्री बनने के बाद विवादों का सिलसिला तब और बढ़ गया जब आरसीपी सिंह को राज्यसभा का दोबारा टिकट नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्हें केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उन पर भ्रष्टाचार और संपत्ति छिपाने के गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे संबंधों में आई दरार और गहरी हो गई। साल 2022 में उन्होंने अत्यंत कड़वाहट के साथ जेडीयू से इस्तीफा दे दिया। पार्टी छोड़ने के बाद वे कुछ समय के लिए भाजपा में शामिल हुए और बाद में जनसुराज के साथ भी जुड़े। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कोई औपचारिक संवाद नहीं रहा।

7 सर्कुलर रोड पर मुलाकात का महत्व

बिहार की राजनीति में सत्ता के बदलते स्वरूप के बीच नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद से हटकर राज्यसभा सांसद बन चुके हैं और उन्होंने अपना नया आवास 7 सर्कुलर रोड को बनाया है। इस आवास पर आरसीपी सिंह का पहुंचना कोई साधारण घटना नहीं मानी जा रही है। वर्तमान में एनडीए में सत्ता की कमान भाजपा के पास है और जेडीयू में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगाई जा रही हैं। जानकारों का मानना है कि जेडीयू अपनी पुरानी ताकत को वापस पाने के लिए कद्दावर नेताओं को फिर से एकजुट करने की रणनीति अपना रही है, जिसमें आरसीपी सिंह का नाम सबसे प्रमुख है।

क्या कहते हैं आरसीपी सिंह के शब्द

इस मुलाकात के बाद आरसीपी सिंह ने सोशल मीडिया पर जो लिखा, उसने सभी का ध्यान खींचा है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद, हमारे नेता आदरणीय नीतीश बाबू से भेंट हुई। उनसे बातचीत हुई, मुलाकात बहुत आत्मीय रही। उनका यह संबोधन कि नीतीश कुमार हमारे नेता हैं, यह स्पष्ट करता है कि वे पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ चुके हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में यह बहस छेड़ दी है कि क्या आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

लव-कुश समीकरण की वापसी की संभावना

आरसीपी सिंह का प्रशासनिक अनुभव और संगठन पर उनकी गहरी पकड़ जेडीयू के लिए एक बड़ी संपत्ति रही है। खासकर कुर्मी-कोइरी यानी लव-कुश समीकरण को साधने में वे बेहद कारगर माने जाते हैं। बिहार में जाति आधारित राजनीति की हकीकत को देखते हुए, नीतीश कुमार के लिए आरसीपी सिंह का साथ दोबारा आना राजनीतिक रूप से बेहद फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, दोनों ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस मुलाकात में भविष्य की राजनीति की रूपरेखा तैयार की गई है। आने वाले समय में बिहार की सियासत में यह एक बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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