पटना का जेपी गंगा पथ बना 'पिंक पैराडाइज', रील बनाने वालों के लिए बना आकर्षण का केंद्र बिहार एक घंटा पहले 2
पटना के जेपी गंगा पथ पर इन दिनों गुलाबी फूलों की बहार छाई हुई है, जिसे सोशल मीडिया पर लोग पिंक पैराडाइज कह रहे हैं। अपनी खूबसूरती के कारण यह इलाका इंस्टाग्राम रील बनाने वालों और फोटोग्राफी के शौकीनों का पसंदीदा अड्डा बन चुका है।

सोशल मीडिया पर छाया पिंक पैराडाइज

पटना का जेपी गंगा पथ इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सड़क के किनारे लगाए गए पौधों पर गुलाबी कनेर के फूल बड़ी संख्या में खिले हैं, जिससे यह इलाका किसी पिंक पैराडाइज जैसा नजर आने लगा है। सुबह और शाम के समय यहाँ रील बनाने वालों और फोटोग्राफी के शौकीनों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

क्यों खास है यह इलाका

इस जगह की सबसे बड़ी खूबसूरती यहाँ लगे गुलाबी फूलों की कतारें हैं। यह इलाका न केवल शहर की शोभा बढ़ा रहा है, बल्कि आम लोगों के लिए घूमने-फिरने का बेहतरीन स्थान बन गया है। यहाँ बैठने की भी अच्छी व्यवस्था की गई है और अलग-अलग किस्म के फूलों ने वातावरण को रंगीन बना दिया है। इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर इस जगह की अनगिनत रील्स वायरल हो रही हैं, जहाँ कंटेंट क्रिएटर्स तरह-तरह के सिनेमैटिक शॉट्स ले रहे हैं।

परफेक्ट फोटोशूट के लिए बेहतरीन समय

जेपी गंगा पथ पर स्थित यह खास स्पॉट एल एंड टी साइट के ठीक सामने है। यहाँ बना जिग-जैग वॉकिंग ट्रैक टहलने के लिए लोगों की पहली पसंद है। फोटोग्राफी के जानकारों का मानना है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यानी गोल्डन आवर के दौरान यहाँ का नज़ारा बेहद मनमोहक होता है। जब सूरज की सुनहरी किरणें गुलाबी फूलों पर पड़ती हैं, तो यहाँ की तस्वीरें और वीडियो देखते ही बनते हैं।

कनेर के फूलों की खूबसूरती और सावधानी

जानकारी के अनुसार, यहाँ लगे पौधे कनेर के हैं। यह एक सदाबहार सजावटी पौधा है जो कम देखभाल में भी खूब फूल देता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस खूबसूरती का आनंद दूर से ही लेना चाहिए। कनेर का पौधा विषैला होता है और इसका कोई भी हिस्सा शरीर के अंदर जाने पर स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। अतः यहाँ आने वाले पर्यटकों को इन फूलों से सावधान रहने की हिदायत भी दी गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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