इंस्टा-टिंडर को कहा अलविदा, ओल्ड स्कूल रोमांस की ओर लौट रही GenZ; हाथ की चिट्ठी में बयां कर रही दिल की बात बिहार 2 घंटे पहले 3
पटना म्यूजियम में युवा और बुजुर्ग डिजिटल चैट छोड़कर हाथ से खत लिखने की पुरानी परंपरा अपना रहे हैं, जहां खूबसूरत चिट्ठी लिखने की कला भी सिखाई जा रही है और डाक भेजने का इंतजाम भी मुफ्त में हो रहा है।

व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के इस डिजिटल दौर में बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद दिलकश और भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्ग तक स्क्रीन पर होने वाली डिजिटल बातचीत से हटकर कागज पर कलम चलाने की भूली-बिसरी परंपरा को दोबारा गले लगा रहे हैं।

पटना म्यूजियम बना भावनाओं का ठिकाना

पटना म्यूजियम इन दिनों एक अनोखे केंद्र में तब्दील हो गया है, जहां लोग चैटिंग की जगह हाथ से चिट्ठी लिखने की पुरानी रवायत को फिर से अपना रहे हैं। टाइप किए गए संदेशों की भीड़ में अब लोग अपनी भावनाएं स्याही और कागज के जरिए उतार रहे हैं।

सिखाई जा रही है खत लिखने की कला

इस केंद्र की सबसे खास बात यह है कि यहां लोगों को सिर्फ चिट्ठी डालने की सुविधा नहीं दी जा रही, बल्कि उन्हें खूबसूरत और सलीकेदार खत लिखने का तरीका भी सिखाया जा रहा है। दिल की बात को शब्दों में पिरोने का यह हुनर नई पीढ़ी के लिए एकदम नया अनुभव साबित हो रहा है।

डाकघर के झंझट से मुक्ति

यहां आने वालों को डाकघर के चक्कर लगाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। म्यूजियम में रखे लेटर बॉक्स में चिट्ठी डालते ही आगे का सारा इंतजाम अपने आप पूरा हो जाता है। यही वजह है कि इसे पटना का अपनी तरह का अनूठा 'लव एंड इमोशन' सेंटर कहा जा रहा है।

पुरानी परंपरा की नई वापसी

तकनीक के तेज रफ्तार दौर में जहां रिश्तों की गर्माहट कहीं खोती जा रही थी, वहीं हाथ से लिखी चिट्ठी एक बार फिर लोगों को जोड़ने का माध्यम बन रही है। GenZ की यह वापसी इस बात की गवाही है कि भावनाओं को बयां करने का सबसे असरदार तरीका आज भी कलम और कागज ही हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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