बिहार
एक महीने पहले
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विचारों
बिहार में जमीन रजिस्ट्री की नई डिजिटल क्रांति
बिहार में जमीन, मकान, फ्लैट या किसी भी अन्य संपत्ति की खरीद-बिक्री करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने निबंधन यानी रजिस्ट्री की जटिल प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा निर्णय लिया है। आने वाले अगस्त महीने से पूरे बिहार में संपत्ति की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह से पेपरलेस और डिजिटल हो जाएगी। इस नई पहल के साथ ही आम जनता को फाइलों का ढेर लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की मजबूरी से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।
राज्य के सभी 145 निबंधन कार्यालय होंगे हाईटेक
बिहार सरकार का लक्ष्य राज्य में व्याप्त रजिस्ट्री संबंधी समस्याओं का समाधान डिजिटल माध्यम से करना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बिहार के सभी 145 निबंधन कार्यालयों को पूरी तरह से ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। इस कदम से निबंधन कार्यालयों में सक्रिय दलालों के हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। अब दस्तावेजों की तैयारी से लेकर उनके सत्यापन और अंतिम रजिस्ट्री तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित होगी, जिससे काम में तेजी आएगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
हाजीपुर से हुई शुरुआत
इस नई पेपरलेस प्रणाली का शुभारंभ आधिकारिक तौर पर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 11 जुलाई को हाजीपुर जिला निबंधन कार्यालय से इस डिजिटल सिस्टम का उद्घाटन किया है। बिहार निबंधन नियमावली 2026 के अंतर्गत सरकार ने पहले चरण में 10 चुनिंदा रजिस्ट्री दफ्तरों को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने का लक्ष्य रखा है। हाजीपुर में इस सिस्टम की सफल शुरुआत के बाद अब विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
18 जुलाई को नौ और कार्यालयों में लागू होगी नई व्यवस्था
प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार, आगामी 18 जुलाई को राज्य के नौ और निबंधन कार्यालयों को इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा। इन कार्यालयों में मुख्य रूप से जिला निबंधन कार्यालय जहानाबाद शामिल है। इसके अलावा जिन अन्य कार्यालयों को पहले चरण में शामिल किया गया है, उनमें निम्नलिखित स्थान शामिल हैं:
- अवर कार्यालय पातेपुर (वैशाली)
- फतुहा (पटना)
- संपतचक (पटना)
- सोनपुर (सारण)
- डेहरी ऑन-सोन (रोहतास)
- मंझौल (बेगूसराय)
- बाबूबरही (मधुबनी)
- अवर निबंधन कार्यालय सोनवर्षा (सहरसा)
इसके अतिरिक्त, इसी महीने पटना और मधुबनी जिलों सहित लगभग दो दर्जन से अधिक कार्यालयों को डिजिटल सिस्टम के दायरे में लाने की योजना है।
कैसे काम करेगा यह पेपरलेस सिस्टम
मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने अगस्त तक सभी 145 कार्यालयों को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल करने की तैयारी पूरी कर ली है। नई व्यवस्था में खरीदार, विक्रेता और निबंधन अधिकारी सभी प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा करेंगे। रजिस्ट्री के लिए ई-साइन यानी डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग किया जाएगा। डीड लेखन और सर्विस प्रोवाइडर से जुड़े नियमों में भी सरकार द्वारा आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं, और इस कार्य से जुड़े संबंधित कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे नई तकनीक का कुशलतापूर्वक उपयोग कर सकें।
आधार और ओटीपी से सुरक्षा
दस्तावेजों की सुरक्षा और धोखाधड़ी को रोकने के लिए नई व्यवस्था में कड़े सुरक्षा मानक अपनाए गए हैं। अब रजिस्ट्री के समय खरीदार और विक्रेता दोनों का आधार कार्ड के जरिए सत्यापन किया जाएगा, जो उनकी सहमति पर आधारित होगा। ई-साइन की प्रक्रिया ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के माध्यम से पूरी की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस तकनीक के इस्तेमाल से दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने या नकल तैयार करने की संभावना काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
आम नागरिकों को मिलेंगे ये बड़े लाभ
इस बदलाव से जनता को सीधे तौर पर कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं:
- कागजी फाइलों के भारी बोझ और उनसे जुड़ी दिक्कतों से मुक्ति मिलेगी।
- पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
- डिजिटल सत्यापन के कारण जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
- लोगों का कीमती समय बचेगा और बेवजह के खर्चों में कटौती होगी।
- दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड करने और कहीं से भी ई-साइन करने की सुविधा मिलेगी।
ई-निबंधन पोर्टल की सुविधा
जिन कार्यालयों में अभी पूरी तरह से पेपरलेस व्यवस्था लागू नहीं हुई है, वहां के नागरिकों के लिए सरकार ने पहले से ही ई-निबंधन की वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध करा रखी है। नागरिक मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर जमीन या फ्लैट से जुड़े जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। यह ऑनलाइन पोर्टल जनता के लिए 24 घंटे खुला रहता है, जिससे कार्यालयों में लंबी कतारों से बचा जा सकता है और आम लोग अपनी सुविधा के अनुसार काम निपटा सकते हैं।
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