भ्रष्ट इंजीनियर पवन कुमार पर EOU का बड़ा एक्शन: पटना से दिल्ली-नोएडा तक करोड़ों की अवैध संपत्ति को लेकर छापेमारी बिहार 2 महीने पहले 80
भवन निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शिकंजा कसा है। पटना, भागलपुर, नोएडा और दिल्ली स्थित छह ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान जारी है।

भ्रष्ट अधिकारियों पर EOU की कार्रवाई

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। भवन निर्माण विभाग में तैनात अधीक्षण अभियंता पवन कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति जुटाई है, जिसके चलते जांच एजेंसी ने एक साथ कई शहरों में दबिश दी है।

104 प्रतिशत अधिक संपत्ति का मामला

जांच एजेंसी के अनुसार, पवन कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से करीब 103.94 प्रतिशत अधिक, यानी 3 करोड़ 89 लाख 79 हजार रुपये की अवैध संपत्ति बनाई है। इस मामले में विशेष निगरानी अदालत, पटना से तलाशी वारंट जारी होने के बाद ईओयू की टीमें हरकत में आईं।

इन छह ठिकानों पर जारी है छापेमारी

ईओयू की अलग-अलग टीमें कुल छह स्थानों पर एक साथ तलाशी ले रही हैं। इनमें शामिल हैं:

  • पटना के उत्तरी श्रीकृष्णापुरी स्थित यमुना निवास अपार्टमेंट का फ्लैट
  • पटना स्थित आधिकारिक कार्यालय
  • भागलपुर के आनंदगढ़ कॉलोनी, तिलकामांझी स्थित मकान
  • नोएडा सेक्टर-75 स्थित फ्लैट
  • नोएडा का एक अन्य आवासीय ठिकाना
  • नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 स्थित फ्लैट

जांच का दायरा और वर्तमान तैनाती

फिलहाल पवन कुमार भवन निर्माण विभाग के भवन निरूपण अंचल-1, पटना में अधीक्षण अभियंता के रूप में तैनात हैं। इसके अलावा, वह निदेशक, निरूपण इकाई, पटना भवन प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार भी देख रहे हैं। जांच एजेंसी की टीमें मौके पर मौजूद दस्तावेजों, बैंक खातों के विवरण, निवेश की जानकारी, नकदी और आभूषणों की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पूरी तलाशी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद ही बरामद संपत्ति और अन्य वित्तीय अनियमितताओं का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक किया जाएगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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