बिहार में सरकारी शिक्षकों पर कोचिंग-ट्यूशन की पाबंदी, नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई बिहार एक महीने पहले 15
बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को निजी कोचिंग या ट्यूशन पढ़ाने से रोक दिया है। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के मकसद से शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सख्त आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अब कोई भी शिक्षक न तो कोचिंग संस्थान चला सकेगा और न ही निजी ट्यूशन पढ़ा सकेगा। इस निर्देश का पालन न करने वाले शिक्षकों के विरुद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या कहता है निदेशक का निर्देश

माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षक विद्यालय परिसर हो या कोई अन्य स्थान, कहीं भी निजी कोचिंग अथवा ट्यूशन से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकते। ऐसा करना विभाग द्वारा तय आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

जिला अधिकारियों को निगरानी का जिम्मा

शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को यह आदेश पूरी सख्ती से लागू कराने को कहा है। साथ ही उन्हें अपने-अपने जिलों में इसकी नियमित निगरानी करने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर इस आदेश की अनदेखी न हो सके।

पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर की चिंता

विभाग का मानना है कि फिलहाल सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक मौजूद हैं। ऐसे में शिक्षकों की पहली जिम्मेदारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। विभाग का तर्क है कि यदि शिक्षक निजी कोचिंग और ट्यूशन में समय लगाएंगे तो इसका सीधा असर स्कूलों में पढ़ाई के स्तर पर पड़ेगा।

शिक्षकों की जवाबदेही पर जोर

आदेश में यह भी कहा गया है कि सरकारी शिक्षक छात्रों की शैक्षणिक प्रगति के प्रति जवाबदेह हैं, इसलिए उन्हें अपना पूरा समय और ऊर्जा विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में लगानी चाहिए। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होना स्वीकार्य नहीं होगा।

गुणवत्ता सुधार की दिशा में अहम कदम

शिक्षा विभाग के इस निर्णय को सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इससे शिक्षकों की जवाबदेही बढ़ेगी और विद्यालयों में पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला स्तर पर इस आदेश का अनुपालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है और नियम तोड़ने वाले शिक्षकों पर क्या कार्रवाई होती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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