बिहार
2 घंटे पहले
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प्रशांत किशोर की जीत पर अनंत सिंह की प्रतिक्रिया
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को मिली जीत के बाद बिहार की राजनीति में कई तरह के बयान सामने आ रहे हैं। इस क्रम में मोकामा के चर्चित नेता अनंत सिंह ने न केवल उन्हें जीत की बधाई दी, बल्कि उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व की खुलकर प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर इस समय के सबसे प्रभावशाली और ईमानदार राजनेता के रूप में उभरे हैं।
ईमानदार बाप का बेटा ईमानदार होता है
प्रशांत किशोर की तारीफ करते हुए अनंत सिंह ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार पिता की संतान भी ईमानदार ही होती है। अनंत सिंह के अनुसार, प्रशांत किशोर के पिता बेहद नेक इंसान थे, जिसका सीधा असर उनके बेटे के चरित्र पर भी पड़ा है। उन्होंने प्रशांत किशोर को न सिर्फ शिक्षित बताया, बल्कि यह भी कहा कि वह हर मामले में शीर्ष पर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशांत किशोर की पहचान केवल एक रणनीति बनाने वाले की नहीं, बल्कि एक सच्चे और ईमानदार नेता की है।
242 विधायकों पर अकेले भारी
बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए अनंत सिंह ने प्रशांत किशोर की तुलना अन्य विधायकों से की। उन्होंने दावा किया कि प्रशांत किशोर का कद इतना ऊंचा और उनकी राजनीतिक क्षमता इतनी अधिक है कि वह अकेले ही 242 विधायकों पर भारी पड़ते हैं। यह बयान बिहार के सियासी खेमे में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें मौजूदा व्यवस्था के कई बड़े नेताओं को एक साथ चुनौती दी गई है।
नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर की तुलना
अनंत सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जैसा नेता होना संभव नहीं है, लेकिन आज के दौर में अगर किसी की तुलना की जाए, तो प्रशांत किशोर जैसा दूसरा कोई नहीं है। वह प्रशांत किशोर के प्रभाव को लेकर काफी आश्वस्त नजर आए।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय
बांकीपुर उपचुनाव की यह जीत जन सुराज के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। प्रशांत किशोर को मिल रहे ऐसे समर्थन से उनका राजनीतिक रसूख और भी बढ़ गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर प्रशांत किशोर का अपना रुख काफी तटस्थ रहा है। जब उनसे अनंत सिंह की टिप्पणियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह उन्हें नहीं जानते हैं। इस घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों और चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर सत्ता और विपक्ष के नेता अपनी राय रख रहे हैं, वहीं प्रशांत किशोर अपने अलग राजनीतिक पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।
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