राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
4
विचारों
राजनीतिक गलियारों में चार बड़े मुद्दों की चर्चा
इस समय देश की पूरी राजनीति चार मुख्य बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूम रही है और इन सभी मुद्दों का सीधा संबंध भारतीय जनता पार्टी के उन मतदाताओं से है जिन्हें मोदी-योगी सरकार का कोर वोटर माना जाता है। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने संसद से लेकर उत्तर प्रदेश की विधानसभा तक राम मंदिर में चढ़ावे के मुद्दे को लेकर काफी हंगामा खड़ा कर रखा है। इसके अलावा छात्रों के बीच बेरोजगारी और पेपर लीक का मुद्दा हो, यूजीसी के नए नियमों से उपजी सवर्ण समाज की नाराजगी हो, या फिर शहरी मतदाताओं के लिए ई-20 नीति का मसला हो, विपक्ष इन सभी का इस्तेमाल करके भाजपा की मजबूत पकड़ को कमजोर करना चाहता है।
राम मंदिर और चढ़ावे को लेकर मचा घमासान
राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर चल रही राजनीति वर्तमान में सबसे अधिक चर्चा में है। यह मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। मामले में विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया जा चुका है और आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो गई है। प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव किए गए हैं, फिर भी विपक्षी दल इसे बड़ा मुद्दा बनाए हुए हैं। जो लोग पहले राम मंदिर निर्माण को लेकर सवाल खड़े करते थे और मंदिर से कोई लाभ न होने की बात करते थे, आज वे रामभक्त होने का प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे घेरा, जिसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने तीखा पलटवार किया। रिजिजू ने साफ तौर पर कहा कि विपक्ष को पहले भगवान राम का अपमान करने के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए, उसके बाद ही उन्हें सरकार से जवाब मांगने का नैतिक अधिकार है।
यूपी विधानसभा में सतीश महाना की नाराजगी
संसद की तरह ही उत्तर प्रदेश की विधानसभा में भी राम मंदिर के मुद्दे पर जमकर बवाल हुआ। समाजवादी पार्टी के विधायकों ने सदन के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को अपनी कुर्सी से उठकर सख्त निर्देश देने पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर से संबंधित आपत्तिजनक पोस्टर लहराने पर कड़ी नाराजगी जताई। स्पीकर सतीश महाना ने सदन में सपा विधायक सचिन यादव को पूरे सत्र के लिए निष्कासित कर दिया। उन्होंने कहा कि सदन में गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अलावा, विधायक आरके वर्मा के आचरण पर भी अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और संकेत दिए कि उनके व्यवहार को आचार समिति के पास भेजकर सदस्यता समाप्त करने तक की कार्रवाई हो सकती है। सतीश महाना ने सदन में उपस्थित विपक्षी सदस्यों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि किसी ने भी राम मंदिर के लिए चंदा दिया है, तो वे उसकी रसीद लेकर आएं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि जिन्हें चंदे की चिंता है, वे रसीद पेश करें ताकि यह पता चल सके कि असल में किसका पैसा चोरी हुआ है।
अखिलेश यादव का सवर्ण और पीडीए का नया समीकरण
अखिलेश यादव अब केवल पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के भरोसे नहीं रहना चाहते हैं। वे 2027 के चुनावों में पूर्ण बहुमत हासिल करने के लिए अब सवर्ण मतदाताओं को भी अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में लखनऊ में प्रबुद्ध सम्मेलन का आयोजन किया गया। समाजवादी पार्टी जनेश्वर मिश्र की जयंती के माध्यम से ब्राह्मण समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने का प्रयास कर रही है। सपा ने सनातन पांडे और पवन पांडे जैसे ब्राह्मण चेहरों को आगे किया है, जबकि माता प्रसाद पांडे को विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन करने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा और 2027 में भाजपा का सत्ता में आना निश्चित है।
सवर्ण वोटर्स और भाजपा का रिश्ता
सीएसडीएस लोकनीति के आंकड़ों के अनुसार, 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सवर्ण मतदाताओं का 85 प्रतिशत हिस्सा भाजपा गठबंधन के साथ था। वहीं 2024 के लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा 79 प्रतिशत रहा। हालांकि लोकसभा में भाजपा की सीटें कम हुईं, लेकिन सवर्ण मतदाताओं ने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा। अब विपक्ष इसी मजबूत कड़ी में सेंध लगाने की ताक में है। यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी उच्च जातियों में असंतोष देखा गया है, जिसका फायदा उठाने के लिए विपक्ष सक्रिय है। राजस्थान के जयपुर में राजपूत करणी सेना द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन में लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ, जिसने इस मुद्दे को और तूल दिया। करणी सेना प्रमुख महिपाल सिंह मकराना ने सीधे तौर पर भाजपा को चुनाव में वोट न देने की चेतावनी दी है।
युवा और शहरी मतदाताओं पर डोरे
युवाओं के बीच पैठ बनाने के लिए राहुल गांधी आगामी 8 अगस्त को प्रयागराज में बेरोजगारी और पेपर लीक के मुद्दे पर एक बड़ा कार्यक्रम करने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 18 से 25 वर्ष की आयु के लगभग 3 करोड़ 27 लाख मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का 21.19 प्रतिशत है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन को इस आयु वर्ग के 45 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को भी लगभग इतना ही युवा समर्थन प्राप्त हुआ था। इसके साथ ही, अरविंद केजरीवाल ने ई-20 नीति के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने की योजना बनाई है। उनका मानना है कि ई-20 का मुद्दा उत्तर भारत के शहरी मतदाताओं को प्रभावित करेगा, जो भाजपा का एक बड़ा और स्थिर वोट बैंक माना जाता है। लोकसभा चुनाव 2024 में शहरी क्षेत्रों में भाजपा को 43 प्रतिशत और बड़े शहरों में 44 प्रतिशत वोट मिले थे, जिन्हें अपने पाले में करने के लिए विपक्षी नेता लगातार सक्रिय हैं।
Comments
0 comment