संसदीय समितियों का पुनर्गठन, टीएमसी के हाथों से छिनी दो अहम कमेटियों की कमान भारत 14 घंटे पहले 2
संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इस फेरबदल के चलते तृणमूल कांग्रेस को दो प्रमुख समितियों की अध्यक्षता से हाथ धोना पड़ा है, जबकि भाजपा और सहयोगी दलों के कई नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

संसदीय समितियों में बड़े बदलाव

संसद की विभाग-संबंधी स्थायी समितियों का शनिवार को नए सिरे से पुनर्गठन किया गया है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सहमति से विभिन्न संसदीय समितियों के अध्यक्षों में बदलाव की घोषणा की गई। इस बड़े फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव में आई कमी को लेकर है। टीएमसी के हाथ से दो महत्वपूर्ण संसदीय समितियों की कमान निकल गई है। नए बदलावों के तहत, वाणिज्य समिति की जिम्मेदारी अब बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी संभालेंगे, जबकि केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स समिति की कमान काकोली घोष दस्तीदार को सौंपी गई है।

वाणिज्य समिति और सुधांशु त्रिवेदी की नई भूमिका

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी को अब संसदीय वाणिज्य समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इससे पहले इस समिति की अध्यक्षता टीएमसी की डोला सेन कर रही थीं। वहीं, केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स से जुड़ी समिति की जिम्मेदारी में भी बड़ा बदलाव हुआ है। टीएमसी के बागी धड़े की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने अब इस समिति की कमान संभाली है। उन्होंने अपने पूर्व पार्टी सहयोगी कीर्ति आजाद का स्थान लिया है, जो पहले इस पद पर कार्यरत थे।

डीएमके और सहयोगी दलों की स्थिति

संसदीय समितियों के पुनर्गठन में डीएमके के सांसदों का दबदबा बरकरार है। डीएमके के तिरुचि शिवा और कनिमोझी को फिर से उनकी संबंधित समितियों का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। तिरुचि शिवा जहां इंडस्ट्री कमेटी की कमान संभाले रखेंगे, वहीं कनिमोझी फूड, कंज्यूमर अफेयर्स एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन कमेटी की अध्यक्ष बनी रहेंगी। इसके अलावा, बीजेपी के प्रमुख सहयोगी दलों जैसे जेडीयू, शिवसेना और टीडीपी के नेताओं को भी समितियों की अध्यक्षता पर बरकरार रखा गया है, जो एनडीए गठबंधन की एकजुटता को दर्शाता है।

विपक्ष के प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारी बरकरार

कई समितियों में बदलाव के बावजूद विपक्ष के कुछ प्रमुख चेहरों को उनकी जिम्मेदारी पर यथावत रखा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे। वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी कृषि समिति का नेतृत्व जारी रखेंगे। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल से जुड़ी समिति की कमान कांग्रेस के मुकुल वासनिक के पास ही बनी रहेगी। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति के अध्यक्ष के रूप में काम करना जारी रखेंगे।

रक्षा से लेकर कानून तक की जिम्मेदारी

संसद की अन्य प्रमुख समितियों की बात करें तो बीजेपी के राधा मोहन सिंह को रक्षा समिति की अध्यक्षता दी गई है। जेडीयू के संजय कुमार झा परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। शिवसेना के श्रीरंग बारणे ऊर्जा समिति की बागडोर संभालते रहेंगे। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय समिति में भी बदलाव हुआ है, जहां बीजेपी के सुजीत कुमार ने अपने ही पार्टी के सहयोगी बृजलाल की जगह कमान संभाली है।

अनुराग ठाकुर और अन्य प्रमुख नियुक्तियां

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर को एक बार फिर कोयला, खान और इस्पात संबंधी संसदीय समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी जल संसाधन समिति के अध्यक्ष पद पर काम करना जारी रखेंगे। वहीं, बीजेपी के भर्तृहरि महताब वित्त समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। गृह मामलों की समिति की कमान बीजेपी के राधा मोहन दास अग्रवाल के हाथों में बरकरार रखी गई है।

तकनीकी और बुनियादी ढांचा संबंधी बदलाव

संसदीय समितियों के इस बड़े फेरबदल में संचार और आईटी समिति के अध्यक्ष के रूप में बीजेपी के निशिकांत दुबे को फिर से नियुक्त किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन समिति की अध्यक्षता बीजेपी की मेधा विश्राम कुलकर्णी संभालती रहेंगी। रेलवे समिति के ढांचे में भी बदलाव किया गया है, जहां बीजेपी के सुधीर गुप्ता ने सीएम रमेश की जगह ली है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज समिति की कमान कांग्रेस के सप्तगिरी शंकर उलाका को फिर से सौंप दी गई है।

संसद की स्थायी समितियों का महत्व

भारत की संसदीय प्रणाली में विभाग-संबंधी स्थायी समितियां बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के कामकाज का बारीकी से परीक्षण करती हैं। लोकसभा की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ऐसी कुल 24 विभाग-संबंधी स्थायी समितियां हैं। प्रत्येक समिति में 31 सदस्य होते हैं, जिनमें 21 लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से नामित किए जाते हैं। इन समितियों का कार्यकाल सामान्यतः एक वर्ष का होता है, जिसके बाद उनका पुनर्गठन किया जाता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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