मुंबई प्रदर्शन में बच्चों को ढाल बनाने का मामला, NHRC ने मुंबई पुलिस और X को जारी किया कड़ा नोटिस राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
मुंबई में सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल और उन पर भड़काऊ नारेबाजी के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। आयोग ने इस मामले में मुंबई पुलिस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स सहित अन्य संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी पर आयोग सख्त

मुंबई में हाल ही में हुए एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों को आगे करने और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी एनएचआरसी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण कानून, 1993 की धारा 12 के तहत इस पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के भारत स्थित शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किए हैं।

क्या है पूरा विवाद और आरोप

यह पूरा मामला 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से यह प्रदर्शन किया गया था, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की मांग उठाई गई थी। प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताएं बताई गई थीं। इस मामले में सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान न केवल बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की गई, बल्कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो भी सामने आए जिनमें एक बच्चे को भीड़ के ऊपर हवा में उठाया गया है। साथ ही, इन वीडियो में बच्चों से कथित तौर पर आपत्तिजनक और भड़काऊ नारे लगवाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायत में यह गंभीर आशंका भी जताई गई है कि बच्चों को जानबूझकर प्रदर्शन का हिस्सा बनाया गया ताकि उनकी नाबालिग स्थिति का लाभ उठाकर पुलिस की ओर से होने वाली किसी भी सख्त कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। इसे बच्चों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने की सुनियोजित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

मुंबई पुलिस को जांच के कड़े निर्देश

एनएचआरसी ने मुंबई पुलिस को इस मामले की गहन जांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। पुलिस को कहा गया है कि वे प्रदर्शन से जुड़े फोटो, वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण करें। यदि जांच में किसी भी तरह के संज्ञेय अपराध की पुष्टि होती है, तो संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। पुलिस को उन परिस्थितियों का भी पता लगाना है जिनमें बच्चे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। इसके अलावा, प्रदर्शन के आयोजकों, समन्वयकों और बच्चों को वहां ले जाने वाले वयस्कों की भूमिका की पहचान करना भी पुलिस की जिम्मेदारी होगी।

डिजिटल सबूत और फोरेंसिक जांच

आयोग ने इस मामले में डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। एनएचआरसी ने कहा है कि प्रदर्शन से जुड़ी चैट और कम्युनिकेशन के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए और उनकी फोरेंसिक जांच कराई जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या बच्चों का वहां मौजूद होना पूर्व-नियोजित था। आयोग ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 की धारा 75 और 83(2) के तहत कानूनी प्रावधानों की प्रासंगिकता की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और निजता की सुरक्षा

आयोग ने एक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी निर्देश दिए हैं कि वे मामले से संबंधित सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें। साथ ही, इन संस्थानों से बाल सुरक्षा मानकों और कंटेंट मॉडरेशन की नीतियों के अनुपालन पर सवाल पूछा गया है। महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि प्रभावित बच्चों की देखभाल और सुरक्षा में कोई कमी न रहे। यदि आवश्यक हो, तो बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर उन्हें काउंसलिंग और मनोसामाजिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।

एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता और गरिमा को हर हाल में सुरक्षित रखा जाना चाहिए। आयोग ने संबंधित सभी पक्षों से एक सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने को कहा है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही भविष्य में जिम्मेदारी तय की जाएगी और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। यह मामला बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और प्रदर्शनों में उनके इस्तेमाल पर एक बड़ी बहस छेड़ता है, जिस पर अब प्रशासन की कड़ी नजर है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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