पाली में स्मार्ट हुआ कचरा प्रबंधन: हर घर-दुकान पर लगेगा RFID कार्ड, सड़कों पर दौड़ेंगी EV और CNG गाड़ियां राजस्थान एक घंटा पहले 2
पाली नगर निगम ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण को आधुनिक बनाते हुए 62 सीएनजी और 3 इलेक्ट्रिक वाहन उतारे हैं, साथ ही हर घर और दुकान पर RFID कार्ड लगाए जाएंगे जिनकी स्कैनिंग से कंट्रोल रूम को सीधी जानकारी मिलेगी।

राजस्थान का पाली शहर अब साफ-सुथरा होने के साथ-साथ तकनीक के मामले में भी आगे बढ़ने जा रहा है। अब तक कई मोहल्लों में यह शिकायत आम थी कि कचरा उठाने वाली गाड़ी या तो आई ही नहीं, या फिर बिना कचरा लिए ही आगे निकल गई। पाली नगर निगम ने इसी परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक रूप दे दिया है।

अब शहर में धुआं छोड़ने वाले पुराने वाहनों की जगह पर्यावरण के अनुकूल सीएनजी और इलेक्ट्रिक गाड़ियां कचरा उठाने का काम करेंगी। इतना ही नहीं, हर घर के बाहर एक स्मार्ट कार्ड लगाया जाएगा। जैसे ही गाड़ी किसी घर तक पहुंचेगी, इस कार्ड को स्कैन किया जाएगा और कंट्रोल रूम को तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर से कचरा उठा और किससे नहीं। इससे न तो ठेकेदार लापरवाही कर पाएंगे और न ही गाड़ियां अपना तय रास्ता छोड़ सकेंगी।

62 सीएनजी और 3 इलेक्ट्रिक वाहनों का बेड़ा

निगम की ओर से डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के लिए पहले किए गए टेंडर की अवधि पूरी होने पर अब दो साल के लिए नया टेंडर जारी किया गया है। इसके तहत ठेकेदार ने कुल 65 टीपर गाड़ियां लगाई हैं, जिनमें 62 सीएनजी और 3 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। मोहल्लों में घूम-घूमकर कचरा एकत्र करने के बाद ये वाहन इसे पांच मौखा पुलिया के पास इकट्ठा करेंगे।

1200 किलो कचरा उठाने की क्षमता

इन सभी गाड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हैं। हर वाहन में 1200 किलो कचरा ले जाने की क्षमता है। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए गाड़ियों में अलग-अलग बॉक्स लगाए गए हैं। इसके अलावा दो अतिरिक्त बॉक्स भी दिए गए हैं—एक में सेनेटरी कचरा, डायपर, पट्टियां और मास्क जैसी चीजें डाली जा सकती हैं, जबकि दूसरे में घरेलू हानिकारक कचरा डाला जा सकता है। सभी गाड़ियां हाइड्रॉलिक हैं।

इकट्ठा किए गए कचरे को दो डंपर और जेसीबी की मदद से खेतावास स्थित सोलिड वेस्ट प्लांट तक पहुंचाने का जिम्मा यही कंपनी संभालेगी। इस पूरी व्यवस्था के बदले निगम दो साल की अवधि में कंपनी पर 19 करोड़ रुपए खर्च करेगा।

कंट्रोल रूम से होगी पूरी निगरानी

पाली नगर निगम के आयुक्त नवीन भारद्वाज के अनुसार, इस व्यवस्था की निगरानी के लिए निगम में ही एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। इस कंट्रोल रूम से यह देखा जा सकेगा कि कोई गाड़ी अपने निर्धारित रूट पर चल रही है या नहीं। यदि कोई टीपर गाड़ी तय समय से अधिक देर तक कहीं रुकती है तो कंट्रोल रूम में सायरन बज उठेगा। गाड़ी की रफ्तार ज्यादा होने पर भी कंट्रोल रूम में संदेश पहुंच जाएगा।

सबसे अहम बात यह है कि हर घर और दुकान के बाहर एक RFID कार्ड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही यह जानकारी मिल जाएगी कि वहां से कचरा उठा है या नहीं। जीपीएस आधारित मॉनिटरिंग, रूट ट्रैकिंग और रियल टाइम निगरानी से कचरा संग्रहण व्यवस्था और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनेगी, जिससे पाली शहर साफ और स्वच्छ नजर आने लगेगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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