पलामू में तस्वीरें बनकर जीवंत हो रहीं मूर्तियां, मकराना के पत्थर पर उकेरी जा रही स्मृतियां झारखंड एक घंटा पहले 3
झारखंड के पलामू जिले में एक अनोखा कला केंद्र फोटो के आधार पर पत्थर से हूबहू मूर्तियां तैयार कर रहा है। यहां मकराना के पत्थर से न सिर्फ देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं, बल्कि लोग अपने दिवंगत परिजनों की यादों को सहेजने के लिए भी मूर्तियां बनवा रहे हैं।

तस्वीरों से पत्थर तक का सफर

आज के डिजिटल युग में लोग अपनी यादों को मोबाइल या एलबम में तस्वीरों के माध्यम से सहेजकर रखते हैं, लेकिन पलामू का एक मूर्ति कला केंद्र इस याद को पत्थर पर हमेशा के लिए अमर बना रहा है। पलामू जिले के मेदिनीनगर के पास स्थित श्रीराम मूर्ति कला केंद्र अपनी अनूठी कलाकारी के लिए चर्चा में है। यहाँ कलाकार किसी भी व्यक्ति की तस्वीर देखकर हूबहू वैसी ही प्रतिमा तैयार करने में माहिर हैं। इस केंद्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लोग अपने दादा-दादी, नाना-नानी या परिवार के किसी दिवंगत सदस्य की तस्वीर लेकर यहां पहुंचते हैं और कलाकार उनकी शारीरिक बनावट, पहनावे और चेहरे के भावों को पत्थर पर बेहद बारीकी से उतार देते हैं।

दो दशक का लंबा अनुभव

इस केंद्र के संचालक संजीव कुमार चौधरी पिछले करीब 20 वर्षों से मूर्ति निर्माण के कार्य में जुटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस लंबी यात्रा में कला के स्वरूप और बाजार दोनों में काफी बदलाव आए हैं। शुरुआत के समय में मूर्तियां महज 100 से 500 रुपये में बनकर तैयार हो जाती थीं, लेकिन समय के साथ पत्थर की गुणवत्ता, मजदूरी और अन्य सामग्री की कीमतों में वृद्धि हुई है। पहले यह कार्य अघोर आश्रम के पास किया जाता था, लेकिन अब यह केंद्र बिसफुटा के समीप पूरी तरह से स्थापित हो चुका है। यहां न केवल लोगों के परिजनों की मूर्तियां बनती हैं, बल्कि दुर्गा, काली, गणेश और भगवान शंकर जैसे देवी-देवताओं की भी विभिन्न डिजाइनों में आकर्षक प्रतिमाएं गढ़ी जाती हैं।

मकराना पत्थर की खासियत

मूर्तियों की मजबूती और सुंदरता के लिए यह केंद्र विशेष रूप से राजस्थान के जयपुर से मंगाए गए मकराना पत्थर का उपयोग करता है। संजीव कुमार चौधरी के अनुसार, प्रक्रिया की शुरुआत पत्थर के सही चयन से होती है। इसके बाद कलाकार छैनी और हथौड़ी जैसे पारंपरिक औजारों का उपयोग करके पत्थर के अनावश्यक हिस्सों को हटाते हैं और उसे एक प्रारंभिक आकार देते हैं। फोटो से मूर्ति बनाने की प्रक्रिया में कलाकार के सामने तस्वीर रखी जाती है, ताकि चेहरे की एक-एक बारीकी जैसे आंख, नाक, होंठ और बालों के स्टाइल को पत्थर पर सटीक रूप दिया जा सके। नक्काशी के अंतिम चरणों में बारीक औजारों से फिनिशिंग की जाती है और सतह को घिसकर चिकना बनाया जाता है, जिससे मूर्ति देखने में जीवंत लगे।

कीमत और समय का विवरण

एक मूर्ति के निर्माण में लगभग 10 दिन का समय लग जाता है। कीमतों की बात करें तो सामान्य मूर्तियों का निर्माण लगभग 5 हजार रुपये से शुरू होता है। वहीं, यदि कोई ग्राहक फोटो के आधार पर 1.5 फीट की प्रतिमा बनवाना चाहता है, तो उस पर लगभग 17 हजार रुपये का खर्च आता है। इसके अलावा दो से ढाई फीट की भगवान की प्रतिमा बनवाने के लिए ग्राहक को 15 से 20 हजार रुपये तक का भुगतान करना पड़ता है। मकराना पत्थर के दाम बढ़ने के कारण इन मूर्तियों की लागत में भी वृद्धि हुई है, लेकिन गुणवत्ता के कारण ग्राहकों की मांग लगातार बनी रहती है।

पलामू से बाहर भी है मांग

श्रीराम मूर्ति कला केंद्र में तैयार की गई मूर्तियों की ख्याति अब केवल पलामू तक ही सीमित नहीं है। यहां निर्मित प्रतिमाओं की मांग कोलकाता, रायपुर और कानपुर जैसे बड़े शहरों तक है। यह इस बात का प्रमाण है कि कुशल हाथों से बनाई गई पत्थर की मूर्तियां न केवल पूजा के काम आती हैं, बल्कि भावनात्मक लगाव के कारण लोग इन्हें घर में रखकर अपने दिवंगत प्रियजनों को यादों के रूप में हमेशा अपने पास रखना चाहते हैं। इस प्रकार यह केंद्र कला के माध्यम से भावनाओं को पत्थरों में कैद करने का अद्भुत काम कर रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप