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एक घंटा पहले
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भारत के घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में आई तेजी के बीच सीमा पार पाकिस्तान के चीनी उद्योग में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। पाकिस्तान के चीनी मिल मालिक अपने पास जमा चीनी के विशाल भंडार को बेचने के लिए भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने अपनी सरकार से करीब 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी भारत को निर्यात करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। मिल मालिकों का दावा है कि इस कदम से न केवल उनके गोदामों में सड़ रहा अतिरिक्त स्टॉक कम होगा, बल्कि नकदी के गंभीर संकट से जूझ रही मिलों को राहत मिलेगी और गन्ना किसानों का बकाया चुकाना भी आसान हो जाएगा। हालांकि, भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान से चीनी खरीदने को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है।
पाकिस्तान में चीनी का विशाल भंडार बना बड़ी मुसीबत
पाकिस्तानी चीनी उद्योग के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट बिना बिकी हुई चीनी का भारी स्टॉक है। एसोसिएशन से जुड़े चौधरी वहीद के अनुसार, 15 अगस्त तक देश में चीनी का कुल स्टॉक लगभग 28.1 लाख टन दर्ज किया गया था। पाकिस्तान में चीनी की औसत मासिक खपत लगभग 5.5 लाख टन है। इस हिसाब से देखा जाए तो यह मौजूदा स्टॉक देश की घरेलू जरूरतों को कम से कम दिसंबर 2026 तक पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
इसके साथ ही मिलों के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी है। आगामी नवंबर महीने से नया पेराई सीजन शुरू होने जा रहा है, जिसमें गन्ने से एक बार फिर बड़ी मात्रा में चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है। उद्योग का अनुमान है कि अगले सीजन में देश में लगभग 8000000 मीट्रिक टन (80 लाख मीट्रिक टन) चीनी का उत्पादन हो सकता है। ऐसे में यदि मौजूदा स्टॉक समय रहते बाजार में नहीं निकाला गया, तो गोदामों पर दबाव असहनीय हो जाएगा।
भारत के बाजार और भौगोलिक निकटता पर टिकी उम्मीदें
पाकिस्तानी मिल मालिकों की नजर भारतीय बाजार पर इसलिए टिकी है क्योंकि हाल के हफ्तों में भारत में चीनी की घरेलू कीमतों में तेजी देखी गई है। इसके साथ ही भारत में चीनी पर लगने वाले आयात शुल्क को भी हटाया गया है, जिसे पाकिस्तानी व्यापारी एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।
एसोसिएशन का तर्क है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी सीमा साझा होने के कारण सड़क मार्ग से माल पहुंचाना बेहद आसान और किफायती रहेगा। किसी अन्य सुदूर देश में चीनी निर्यात करने की तुलना में भारत तक परिवहन की लागत बहुत कम आएगी। यदि भारत चीनी के आयात को मंजूरी देता है, तो भौगोलिक निकटता के कारण पाकिस्तान एक बहुत ही प्रतिस्पर्धी सप्लायर बन सकता है। हालांकि, यह अभी केवल पाकिस्तानी उद्योग की तरफ से की गई एक मांग है और इस पर कोई अंतिम सहमति नहीं बनी है।
वित्तीय तंगी और कम कीमतों की मार झेल रहा उद्योग
पाकिस्तान की चीनी मिलें केवल भारी स्टॉक की वजह से ही परेशान नहीं हैं, बल्कि घरेलू बाजार में मिल रही कम कीमतें भी उनकी कमर तोड़ रही हैं। चौधरी वहीद के मुताबिक, इस समय देश में चीनी के एक्स-मिल दाम उत्पादन लागत से भी काफी नीचे चले गए हैं। घरेलू बाजार में मौजूदा एक्स-मिल कीमत करीब 130 से 135 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।
कीमतों में इस भारी गिरावट और माल न बिकने का सीधा असर मिलों की नकदी पर पड़ा है। पूंजी अटक जाने के कारण मिलों को बैंकों का कर्ज चुकाने में दिक्कत आ रही है, और वे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने में भी असमर्थ साबित हो रहे हैं।
सरकारी नीति और चीनी आयात-निर्यात का विरोधाभास
इस पूरे मामले के बीच पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने बुधवार को एक नया कदम उठाते हुए ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान (TCP) को 1.08 लाख मीट्रिक टन चीनी बेचने के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदाएं जारी करने की मंजूरी दे दी है। यह चीनी दरअसल पिछले साल आयात की गई 3 लाख मीट्रिक टन चीनी के स्टॉक का बचा हुआ हिस्सा है।
घरेलू बाजार में कीमतों के बेहद कम होने के कारण इस सरकारी स्टॉक को स्थानीय स्तर पर बेचने के दो प्रयास पहले ही विफल हो चुके हैं। इस परिस्थिति ने पाकिस्तान की चीनी नीति पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां सरकार के पास पहले से आयात की गई चीनी का स्टॉक बचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मिल मालिक अतिरिक्त चीनी को बाहर भेजने के लिए छटपटा रहे हैं। चूंकि भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध ठप हैं, ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या इस व्यापारिक प्रस्ताव को कोई व्यावहारिक रूप मिल पाता है या नहीं।
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