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53 मिनट पहले
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संकट के मुहाने पर खड़ा था पाकिस्तान
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का बड़ा फैसला लिया था। इस निर्णय के बाद पाकिस्तान के भीतर जल संकट को लेकर हड़कंप मच गया था। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 2025 के खरीफ सीजन की शुरुआत में ही अधिकारियों ने 21 फीसदी तक पानी की कमी की आशंका जता दी थी। झेलम और चिनाब नदियों में जल प्रवाह कम होने से पंजाब और सिंध जैसे कृषि प्रधान प्रांतों में हाहाकार मचने की स्थिति थी।
कुदरत ने कैसे बदला पासा
पाकिस्तान के लिए यह संकट तब टल गया जब मौसम ने अप्रत्याशित करवट ली। ऊपरी सिंधु बेसिन में बर्फ के तेजी से पिघलने और अगस्त 2025 में हुई भीषण बारिश ने जलाशयों का भाग्य बदल दिया। पाकिस्तान ने सीजन के लिए 104.03 मिलियन एकड़ फीट पानी का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तव में 122.36 मिलियन एकड़ फीट जल प्रवाह दर्ज किया गया। यह अनुमान से करीब 18 फीसदी ज्यादा था, जिसके चलते सितंबर 2025 तक पाकिस्तान के प्रमुख जलाशय 99 फीसदी तक भर गए थे। कोटरी बैराज के नीचे बहने वाला अतिरिक्त पानी पिछले पांच वर्षों के औसत से 71 फीसदी ज्यादा रहा।
टरबेला डैम: भविष्य का सबसे बड़ा खतरा
हालांकि पाकिस्तान को बाढ़ से फौरी राहत तो मिल गई, लेकिन उसकी जल सुरक्षा की सबसे बड़ी कमजोरी अब भी कायम है। रिपोर्ट के अनुसार, टरबेला डैम की स्टोरेज क्षमता लगातार घट रही है। शुरुआती दिनों में इसकी लाइव स्टोरेज क्षमता 9.68 मिलियन एकड़ फीट थी, जो अब घटकर केवल 5.73 मिलियन एकड़ फीट रह गई है। यानी पिछले कुछ दशकों में इसकी क्षमता में 48 फीसदी की भारी गिरावट आई है।
मिट्टी का जमाव और भविष्य की चुनौतियां
डैम में तलछट यानी सिल्ट का लगातार जमा होना चिंता का मुख्य कारण है। मई 2022 में टरबेला की लाइव स्टोरेज 5.827 मिलियन एकड़ फीट थी, जो मार्च 2026 तक और कम होकर 5.580 मिलियन एकड़ फीट पर आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ भले ही पानी दे दे, लेकिन जलाशयों में जमा हो रही मिट्टी की समस्या का समाधान नहीं कर सकती। चूंकि पाकिस्तान की 90 फीसदी कृषि सिंधु बेसिन पर निर्भर है, इसलिए टरबेला की घटती क्षमता आने वाले समय में देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा संकट पैदा कर सकती है।
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