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एक घंटा पहले
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आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मई 2026 में विदेशों में बसे पाकिस्तानियों ने अपने देश में रिकॉर्ड तोड़ रकम भेजी है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने बुधवार को इससे जुड़े आंकड़े जारी किए, जिनके मुताबिक इस महीने देश में 4.3 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस आया। यह पाकिस्तान के इतिहास में किसी एक महीने में आने वाली सबसे बड़ी रकम है।
इस आंकड़े में पिछले महीने की तुलना में पूरे 20.2 परसेंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले यह 15.4 परसेंट ज्यादा है। इतनी बड़ी रकम आने से पाकिस्तानी सरकार के चेहरे खिल उठे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह आंकड़ा प्रवासी पाकिस्तानियों का देश की अर्थव्यवस्था पर भरोसे को दर्शाता है।
स्टेट बैंक के नए आंकड़ों में क्या सामने आया
वित्त मंत्री के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने इन आंकड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि मई 2026 में वर्कर्स का रेमिटेंस रिकॉर्ड 4.25 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने इसे पाकिस्तान की बाहरी स्थिरता के लिए बेहद मजबूत कदम बताया।
शहजाद के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष 2026 में अभी एक महीना बाकी है, इसके बावजूद देश का कुल रेमिटेंस पहली बार 41 बिलियन डॉलर के पार पहुंचने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह आंकड़ा लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को नई संजीवनी दे सकता है।
डूबती अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी पैसा क्यों अहम
पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में रेमिटेंस की हिस्सेदारी करीब 9 से 10 परसेंट है, जो पड़ोसी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा मायने रखती है। यह विदेशी पैसा देश के व्यापार घाटे को कम करने में मदद करता है और साथ ही विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती देता है।
बाजार में पाकिस्तानी रुपये की कीमत को गिरने से रोकने में भी इस रकम की अहम भूमिका रहती है। देश के करोड़ों घरों का खर्च सीधे इसी पैसे से चलता है और इससे नकदी की कमी भी काफी हद तक दूर होती है।
खाड़ी देशों के तनाव से कमाई पर मंडराता खतरा
हालांकि इस बड़ी खुशखबरी के बीच पाकिस्तान के सामने एक गंभीर खतरा भी खड़ा है। खाड़ी देशों में चल रहे लंबे विवाद के चलते आने वाले समय में इस कमाई पर बुरा असर पड़ सकता है। दुनिया भर में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें पाकिस्तान के बाहरी खाते पर दबाव बना रही हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे प्रमुख रास्तों पर सप्लाई रुकने का डर भी बना हुआ है, और पाकिस्तान की सबसे ज्यादा डॉलर लिक्विडिटी इसी एक कॉरिडोर से जुड़ी है। सऊदी अरब और यूएई मिलकर हर साल 11 बिलियन डॉलर से ज्यादा भेजते हैं, जो पाकिस्तान के कुल रेमिटेंस का एक तिहाई से भी ज्यादा हिस्सा है।
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