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6 घंटे पहले
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पाकिस्तान की सियासत में उबाल
पाकिस्तान में इस समय राजनीतिक हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। शहबाज शरीफ की सरकार शायद ही इस बात का अंदाजा लगा पाई होगी कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के इस लॉन्ग मार्च को जनता से इतना व्यापक समर्थन हासिल होगा। स्थिति तब और भी गंभीर हो गई जब अन्य विपक्षी दलों ने भी इस प्रदर्शन के प्रति अपनी सहानुभूति जताई है, जिससे शहबाज सरकार पर दबाव की स्थिति और ज्यादा बढ़ गई है।
लॉन्ग मार्च का सफर
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का यह विरोध मार्च पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य इमरान खान की रिहाई की मांग करना है। जैसे-जैसे यह मार्च पेशावर के करीब पहुंच रहा है, वहां सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन इस लंबे विरोध मार्च को लेकर काफी सतर्क और आशंकित है। किसी भी तरह की अनहोनी या तनाव को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बंदोबस्त किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि इस मार्च की शुरुआत 4 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा से हुई थी। चूंकि इसी प्रांत में पीटीआई की सरकार है, इसलिए कार्यकर्ताओं का काफिला अलग-अलग क्षेत्रों से होते हुए आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह इस्लामाबाद की ओर कूच करने की तैयारी में है।
कमालिया में कार्रवाई का असर
तनाव के बीच पंजाब प्रांत के कमालिया शहर से बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ पुलिस ने पीटीआई के समर्थन में रैली निकालने के आरोप में 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पंजाब में इस समय मरियम नवाज की सरकार है, जो शहबाज शरीफ की भतीजी भी हैं। प्रशासन का दावा है कि ये लोग तब रैली निकाल रहे थे जब पूरे पंजाब में सार्वजनिक सभाओं और रैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा हुआ है। इस कानूनी कार्रवाई के बाद पीटीआई और सरकार के बीच तनातनी और अधिक बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें भी तेज हो सकती हैं।
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