पाकिस्तान और चीन के बीच लिथियम बैटरी का नया समझौता, क्या इससे सुधरेगी देश की आर्थिक स्थिति? विश्व एक महीने पहले 61
आर्थिक संकट से घिरे पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर कराची में लिथियम आयन बैटरी प्लांट स्थापित करने का करार किया है। इस समझौते को देश में औद्योगिक विकास की नई उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

कराची में नया बैटरी प्लांट

आर्थिक तंगी और बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान ने अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर कराची में एक विशाल लिथियम-आयन बैटरी प्लांट स्थापित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों का मानना है कि यह कदम देश के लिए औद्योगिक विकास का एक नया द्वार खोलेगा और आने वाले समय में एक नए युग की शुरुआत होगी।

सफेद सोने पर चीन और अन्य देशों की नजर

पाकिस्तान के बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान के इलाकों में लिथियम का भंडार मौजूद है, जिसे दुनिया भर में सफेद सोना के नाम से जाना जाता है। इस खनिज की बढ़ती वैश्विक मांग के कारण केवल चीन ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में खनन और प्रसंस्करण को लेकर अपनी गहरी रुचि दिखाई थी। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता के कारण पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की बड़ी उम्मीदें हैं।

क्या कर्ज के जाल में फंसेगा पाकिस्तान

हालांकि, इस डील को लेकर कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी CPEC जैसे पुराने प्रोजेक्ट्स का ट्रैक रिकॉर्ड काफी खराब रहा है। इन पुराने प्रोजेक्ट्स के कारण पाकिस्तान पहले ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि यह नया बैटरी प्लांट भी पुरानी परियोजनाओं की तरह ही विफल साबित हो सकता है और अंततः पाकिस्तान के लिए और अधिक कर्ज का कारण बनेगा।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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