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एक घंटा पहले
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विचारों
वैश्विक कूटनीति में ट्रंप का नया अध्याय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के काम करने का तरीका और बातचीत के दौरान उनके अचानक बदले हुए मिजाज ने दुनिया भर के राजनयिकों की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप का स्वभाव ऐसा है कि वे कब कौन सा अप्रत्याशित कदम उठा लें, इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल होता है। यही कारण है कि दुनिया के तमाम बड़े देशों के प्रतिनिधिमंडल अब ट्रंप से होने वाली किसी भी मुलाकात के लिए विशेष तैयारी कर रहे हैं। वे किसी भी तरह की असहज स्थिति से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। हाल के दिनों में दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जो घटनाएं घटी हैं, उन्होंने इस सतर्कता को और अधिक जरूरी बना दिया है। भारत भी इन स्थितियों को देखते हुए अमेरिका के साथ अपने संबंधों और भावी मुलाकातों को लेकर बेहद संभलकर आगे बढ़ रहा है। भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि सावधानी ही कूटनीतिक सफलता की कुंजी है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के साथ क्या हुआ था?
मई 2025 की बात है, जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा व्यापारिक और आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने के उद्देश्य से व्हाइट हाउस पहुंचे थे। हालांकि, यह बैठक उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। डोनाल्ड ट्रंप ने बैठक के बीच में ही अचानक एक वीडियो प्ले कर दिया, जिसमें दक्षिण अफ्रीका के विपक्षी नेता जूलियस मालेमा 'शूट द बोअर' यानी श्वेत किसानों के खिलाफ हिंसा का नारा लगाते दिख रहे थे। इतना ही नहीं, ट्रंप ने श्वेत किसानों के खिलाफ कथित हिंसा और उनके नरसंहार से जुड़े कुछ लेख भी रामाफोसा के सामने रख दिए। उन्होंने इन विषयों पर राष्ट्रपति रामाफोसा को सीधे घेरने की कोशिश की, जिससे माहौल काफी असहज हो गया था।
रामाफोसा ने कैसे संभाला मोर्चा
डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक सवालों के बावजूद राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने बड़ी चतुराई से स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी विपक्षी नेता के राजनीतिक बयानों को दक्षिण अफ्रीका सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी साफ किया कि दक्षिण अफ्रीका में अपराध की समस्या किसी एक विशेष समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। हालांकि बैठक में तनाव बना रहा, लेकिन रामाफोसा ने कूटनीतिक मर्यादा बनाए रखी। उन्होंने रिश्तों को सुधारने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को दक्षिण अफ्रीका में निवेश के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया। ट्रंप का तीखा हमला और रामाफोसा की सधी हुई प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
जेलेंस्की और ट्रंप के बीच तीखी बहस
28 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में जो हुआ, उसे अमेरिका-यूक्रेन संबंधों के इतिहास की सबसे अप्रिय घटनाओं में गिना जाता है। इस बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की आमने-सामने थे। यूक्रेन की ओर से सुरक्षा की गारंटी और समर्थन की उम्मीद की जा रही थी, वहीं ट्रंप का एकमात्र फोकस युद्ध को समाप्त करने और रूस को बातचीत की मेज पर लाने का था। इस बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण मिनरल्स डील पर हस्ताक्षर होने की योजना थी, जो विवाद के चलते सिरे नहीं चढ़ सकी।
तीखी बहस का आधार क्या था?
बहस की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जेलेंस्की से सवाल किया कि वे युद्ध को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठा रहे हैं। वेंस का कहना था कि अमेरिका युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीति का रास्ता अपना रहा है। इस पर जेलेंस्की ने रूस और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर अविश्वास जताते हुए पिछले समझौतों के टूटने का उदाहरण दिया। जेलेंस्की ने वेंस से कड़ा सवाल किया कि वे किस तरह की कूटनीति की बात कर रहे हैं। जवाब में वेंस ने कहा कि उनका उद्देश्य यूक्रेन में तबाही को रोकना है, लेकिन जेलेंस्की इन दलीलों से सहमत नहीं थे।
ट्रंप का गुस्सा और चेतावनी
बातचीत का स्तर तब और गिर गया जब ट्रंप ने जेलेंस्की पर सीधा आरोप लगाया कि वे यूक्रेन की कमजोर स्थिति के बावजूद हठ कर रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के समर्थन के बिना यूक्रेन का टिक पाना नामुमकिन है। ट्रंप ने जेलेंस्की को अमेरिका के प्रति कृतज्ञता न दिखाने के लिए भी खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने यहां तक कहा कि जेलेंस्की का रवैया तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे सकता है। जेलेंस्की ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने अमेरिकी जनता का आभार कई बार जताया है, लेकिन ट्रंप और वेंस उन पर अपना दबाव बनाए रखना चाहते थे।
कार्ड का मुद्दा और बैठक का अंत
बहस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने जेलेंस्की को कड़ी नसीहत देते हुए कहा, 'आपके पास इस वक्त कोई कार्ड नहीं है।' उनके कहने का अर्थ यह था कि अमेरिका के साथ होने पर ही यूक्रेन की मोलभाव करने की शक्ति बनी रहती है। जेलेंस्की ने इस बात को खारिज करते हुए कहा कि वे कोई खेल नहीं खेल रहे हैं, बल्कि गंभीर मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। अंततः, स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ट्रंप ने कैमरों के सामने ही बैठक को बीच में ही खत्म करने का आदेश दे दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने जेलेंस्की और उनके दल को व्हाइट हाउस छोड़ने का निर्देश दिया। इसके बाद ट्रंप ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जब तक जेलेंस्की शांति वार्ता के लिए गंभीर नहीं हो जाते, उन्हें वापस आने की जरूरत नहीं है। इस घटनाक्रम ने भारत जैसे देशों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य में ट्रंप के साथ कूटनीतिक संवाद के लिए कितनी सावधानी बरतना आवश्यक है।
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