पीओके में सेना का दमन, छवि की चिंता में नेता: प्रदर्शन रोकने की बिलावल की अपील विश्व एक घंटा पहले 2
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच पीपीपी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने आंदोलन खत्म करने की अपील की है। उनका कहना है कि यह अशांति देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा रही है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में थमने का नाम न लेते विरोध प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि अब देश के बड़े नेता भी असहज नजर आ रहे हैं। एक ओर सेना इस इलाके में सख्त कार्रवाई कर रही है, जिसमें लोगों की जान तक जा रही है, वहीं दूसरी ओर नेता यह तर्क देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि इन प्रदर्शनों से देश की अंतरराष्ट्रीय छवि पर बट्टा लग रहा है।

बदनामी की चिंता में डूबे नेता

पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने रविवार को प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पीओके में जारी अशांति केवल इस क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समूचे पाकिस्तान की छवि को प्रभावित कर रही है।

रविवार को जारी अपने बयान में बिलावल ने दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक समझौता होने जा रहा है। उनका कहना था कि ऐसे समय में जब पूरी दुनिया की निगाहें पाकिस्तान पर टिकी हैं, देश के भीतर की यह अशांति उसकी साख को चोट पहुंचा रही है।

प्रदर्शनकारियों से आत्मसमर्पण की मांग

प्रदर्शनकारियों पर कड़ा रुख अपनाने वाली सरकार को अब यह आशंका सता रही है कि देश के विरोधी इन हालात का लाभ उठा सकते हैं। बिलावल ने भी कहा कि मौजूदा स्थिति पाकिस्तान के विरोधियों को फायदा उठाने का अवसर दे रही है। उन्होंने अपील की कि जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लिया है, वे स्थानीय प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करें, ताकि कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि लोगों पर गोलियां चलाने और अपहरण जैसी घटनाओं के बीच अब वही नेता शांति की दुहाई दे रहे हैं। बिलावल का कहना था कि राजनीतिक मसलों का हल लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण रास्तों से निकाला जाना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों को सुलझाने का असली मंच संसद और राजनीतिक प्रक्रिया है, न कि सड़कें—जबकि इसी सरकार ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया।

चुनाव कार्यक्रम वापस लेने की मांग

पीपीपी प्रमुख ने बताया कि उनकी पार्टी पहले ही चुनाव आयोग से 27 जुलाई को तय समय से पहले घोषित चुनाव कार्यक्रम को वापस लेने की मांग कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी एक आयोग गठित करने का प्रयास करेगी, जिससे लंबित शिकायतों का निपटारा हो सके और कोई स्थायी समाधान निकाला जा सके।

पीओके में लगातार जारी प्रदर्शन

जेएएसी के प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार के लिए संकट खड़ा कर दिया है। पूरे पीओके में बड़े पैमाने पर विरोध जारी है। खुद बिलावल ने भी स्वीकार किया कि प्रशासन और जेएएसी के बीच के मतभेदों को सुलझाना आवश्यक है।

5 जून को जेएएसी ने 9 जून को हड़ताल की घोषणा की थी। इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया और इसके कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। प्रमुख अखबार डॉन के अनुसार, रावलाकोट के आसपास धरने लगातार चौथे दिन भी जारी रहे। मुजफ्फराबाद समेत अन्य इलाकों में बाजार बंद हैं, जबकि सार्वजनिक परिवहन कई दिनों से प्रभावित है। कुछ क्षेत्रों से आंशिक हड़ताल की खबरें भी सामने आई हैं।

मोबाइल सेवा ठप, इंटरनेट निलंबित

हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रावलाकोट में रात 8:30 बजे के बाद मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं, जबकि इंटरनेट सेवा लगातार आठवें दिन भी निलंबित रही। इसका सीधा असर छात्रों, फ्रीलांसरों और आम लोगों पर पड़ रहा है, जिन्होंने सरकार से जल्द से जल्द सेवाएं बहाल करने की मांग की है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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