बलूचिस्तान में आसिम मुनीर की स्वीकारोक्ति: अपने ही लोगों को बताया 'विदेशी', बौखलाहट में कही यह बात विश्व एक घंटा पहले 9
बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों और पाकिस्तान सरकार की विफलता के बीच सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अपने ही नागरिकों को विदेशी एजेंट करार दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान बलूचिस्तान में पाक सेना की बढ़ती लाचारी और हार को दर्शाता है।

बलूचिस्तान में मुनीर की हार का कबूलनामा

बलूचिस्तान के हालात ने पाकिस्तान के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को भी हिलाकर रख दिया है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के बढ़ते प्रभाव और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC प्रोजेक्ट्स पर हो रहे लगातार हमलों ने पाकिस्तानी तंत्र की नींव हिला दी है। लंबे समय तक खामोशी साधे रहने के बाद, अब आसिम मुनीर ने अपना मुंह खोला है, लेकिन उनके शब्द यह बताने के लिए काफी हैं कि वे बलूचिस्तान में खुद को पराजित महसूस कर रहे हैं। अपनी साख बचाने की नाकाम कोशिश में मुनीर ने अपने ही देश के नागरिकों को पहचानने से इनकार कर दिया है और उन्हें विदेशी एजेंट बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया है।

इज्जत बचाने के लिए मुनीर का नया पैंतरा

इस्लामाबाद की सत्ता की गलियों में यह चर्चा जोरों पर है कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तान के नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। बीएलए के लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को बलूचिस्तान के उन इलाकों से भी खदेड़ रहे हैं जहां पहले सेना का एकछत्र राज हुआ करता था। आसिम मुनीर, जो अब तक अपने लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं, को अब अपनी नाकामी छुपाने के लिए विदेशी साजिश का सहारा लेना पड़ रहा है। बलूचिस्तान के स्थानीय नेताओं और प्रमुख हस्तियों के साथ हुई एक हालिया बैठक में मुनीर का व्यवहार और उनकी भाषा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी करा दी है। उन्होंने वहां आजादी की मांग करने वाले लड़ाकों और बलूच निवासियों को सीधे तौर पर विदेशी इशारों पर काम करने वाला एजेंट घोषित कर दिया है।

प्राकृतिक संसाधनों का शोषण और सेना की विफलता

बलूचिस्तान का इलाका प्राकृतिक संसाधनों के मामले में बेहद संपन्न है, जहां सोना, तांबा और गैस के अपार भंडार मौजूद हैं। हालांकि, इन संसाधनों पर स्थानीय लोगों का हक नहीं बल्कि इस्लामाबाद की केंद्र सरकार और सेना का कब्जा रहता है। दशकों से यहां के निवासी खुद को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने और अपने संसाधनों के शोषण का विरोध कर रहे हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से सशस्त्र संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए कथित नरसंहार और अपने ही नागरिकों पर की गई एयरस्ट्राइक के बाद, बलूचिस्तान की जनता और पाक सेना के बीच की खाई अब कभी न भरने वाली स्थिति में पहुंच चुकी है।

विदेशी साजिश का राग और पुरानी राजनीति

आसिम मुनीर ने बलूचिस्तान में अपनी विफलता का ठीकरा फोड़ने के लिए वही पुराना और घिसा-पिटा 'विदेशी साजिश' वाला कार्ड खेला है। बैठक में उन्होंने किसी देश का स्पष्ट नाम लिए बिना यह आरोप लगाया कि जो भी लड़ाके बलूचिस्तान में सुरक्षाबलों पर हमला कर रहे हैं, वे बाहरी दुश्मनों के इशारों पर काम कर रहे हैं। उनका दावा है कि इन लोगों का एकमात्र मकसद बलूचिस्तान के विकास को रोकना और वहां की जनता व सरकार के बीच नफरत पैदा करना है। हकीकत यह है कि जब भी पाकिस्तानी सेना किसी प्रांत की आंतरिक सुरक्षा को संभालने में नाकाम रहती है, तो वह हमेशा बाहरी ताकतों पर दोष मढ़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेती है।

बीएलए का बढ़ता असर और सेना की रातों की नींद हराम

पाकिस्तानी सेना प्रमुख का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने अपने हमलों की तीव्रता को कहीं अधिक बढ़ा दिया है। सरकारी ठिकानों, सैन्य चौकियों और CPEC से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बनाकर बीएलए ने यह संदेश दिया है कि अब पाकिस्तान का डर खत्म हो चुका है। हालिया आंकड़ों और घटनाओं पर गौर करें तो स्थिति गंभीर है:

  • जुलाई का महीना: जियारत के इलाके में एक पुलिस चेक पोस्ट पर किए गए बड़े हमले में 27 पुलिसकर्मी मारे गए थे, जिससे पूरी सेना में खलबली मच गई थी।
  • मई का धमाका: क्वेटा में एक शटल ट्रेन को निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती हमले में कम से कम 47 लोगों की जान गई थी और 98 से अधिक लोग बुरी तरह घायल हुए थे।

इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अलगाववादी लड़ाके अब सीधे सुरक्षा बलों के गढ़ में घुसकर हमला करने की क्षमता रखते हैं, जिससे पाकिस्तानी सेना का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है।

चीन की बढ़ती नाराजगी और CPEC का भविष्य

बलूचिस्तान का संकट केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर चीन के हितों पर भी पड़ रहा है। चीन ने CPEC के तहत ग्वादर पोर्ट और आसपास के इलाकों में अरबों डॉलर का निवेश कर रखा है। बीएलए के लड़ाके लगातार चीनी नागरिकों और उनकी परियोजनाओं को निशाना बना रहे हैं, जिससे बीजिंग का धैर्य जवाब दे रहा है। चीन लगातार आसिम मुनीर की सरकार पर अपने नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी देने का दबाव डाल रहा है। सेना की जमीनी नाकामी ने मुनीर को एक ऐसी स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है जहां उन्हें अपने ही लोगों को विदेशी कहना पड़ रहा है, क्योंकि वे सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

दमन की राजनीति और मानवाधिकार का सवाल

बलूचिस्तान के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पाक सेना 'एनफोर्सड डिसअपीयरेंस' के जरिए युवाओं को गायब कर रही है और फर्जी एनकाउंटर कर रही है। बलूच नेताओं को विदेशी प्रॉक्सी बताने के पीछे मुनीर का उद्देश्य केवल उनके संघर्ष को बदनाम करना है। सेना का यह बर्ताव साबित करता है कि उनके पास इस दशकों पुराने संकट का कोई राजनीतिक समाधान नहीं है। जब एक सेना अपने ही नागरिकों की शिकायतों को सुनने के बजाय उन्हें बाहरी मोहरा बताने लगे, तो यह किसी भी देश में पराजय की आधिकारिक स्वीकारोक्ति माना जाता है। आसिम मुनीर और उनकी सेना के लिए बलूचिस्तान अब एक ऐसी आग बन चुका है जिसे बुझाने के बजाय वे खुद उसी में जलते हुए दिखाई दे रहे हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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