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एक घंटा पहले
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मैच का हाल और ब्राजील का दबदबा
फुटबॉल के मैदान पर खेले गए एक महत्वपूर्ण मैत्री मुकाबले में भारतीय टीम को ब्राजील के हाथों 4-0 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील की टीम के खिलाफ भारतीय खिलाड़ियों ने मैच की शुरुआत काफी जोश के साथ की थी। हालांकि, जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, ब्राजील का अनुभव और खेल पर उनका नियंत्रण साफ तौर पर दिखाई देने लगा। इस ऐतिहासिक मुकाबले को देखने के लिए स्टेडियम में 51402 दर्शक मौजूद थे, जिनका भरपूर समर्थन भारतीय टीम को मिला।
शुरुआती 25 मिनट का संघर्ष
मैच के शुरुआती 25 मिनट तक भारतीय टीम ने अपनी रक्षापंक्ति को मजबूती से संभाले रखा और ब्राजील को गोल करने का कोई अवसर नहीं दिया। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने ब्राजील के स्टार खिलाड़ियों को काफी परेशान किया। रियाल मैड्रिड के मशहूर खिलाड़ी विनिसियस जूनियर ने दो बार भारतीय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू को छकाने की कोशिश की, जिसमें एक बार अभिषेक सिंह को पीछे छोड़कर लगाया गया शॉट भी शामिल था, लेकिन गुरप्रीत ने अपनी सतर्कता से गोल नहीं होने दिया।
ब्राजील के गोल और रणनीतिक बदलाव
ब्राजील के कोच कार्लो एंसेलोटी ने टीम में कई बदलाव किए थे और वे अपनी टीम को एक नए रूप में मैदान पर उतार रहे थे। पनामा के खिलाफ 1-1 की बराबरी के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था, लेकिन ब्राजील की ताकत काफी अधिक थी। मैच का पहला गोल 28वें मिनट में एस्तेवाओ ने दागा। इसके बाद 42वें मिनट में पेड्रो ने गोल करके बढ़त को दोगुना कर दिया। खेल के दूसरे हाफ में सैमुअल लिनो ने अपनी चमक बिखेरी और 58वें मिनट के साथ ही मैच के इंजरी टाइम यानी 90+5वें मिनट में गोल दागकर अपनी टीम की 4-0 से बड़ी जीत सुनिश्चित की।
खालिद जमील के नेतृत्व में भारत का प्रदर्शन
भारतीय टीम के कोच खालिद जमील ने पनामा के खिलाफ पिछले मैच की तुलना में टीम में दो बड़े बदलाव किए थे। उन्होंने अनुभवी मिडफील्डर अनिरुद्ध थापा और सहल अब्दुल समद को शुरुआती एकादश में जगह दी, जबकि अपुइया और रिकी शाबोंग को इस बार मौका नहीं मिला। खालिद जमील के मार्गदर्शन में टीम ने ब्राजील जैसी दिग्गज टीम को शुरुआती चरणों में काफी टक्कर दी और यह दिखाने की कोशिश की कि भारतीय फुटबॉल में सुधार हो रहा है।
ब्राजील की नई रणनीति
ब्राजील के लिए यह मैच अपनी टीम को भविष्य के लिए तैयार करने का एक माध्यम था। कार्लो एंसेलोटी ने नियमित गोलकीपर की जगह पेड्रो मोरिस्को को मौका दिया और माउरो जूनियर, गैब्रियल बोंटेम्पो, आंद्रेई सैंटोस तथा माथेउजिन्हो जैसे खिलाड़ियों को आजमाकर अपनी बेंच स्ट्रेंथ को परखा। हालांकि ब्राजील ने इस पूरे मैच के दौरान अपनी सहज गति और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया और भारत को वापसी का कोई बड़ा मौका नहीं दिया। यह मुकाबला भारतीय टीम के लिए सीखने और दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के खिलाफ अपनी कमियों को समझने का एक बड़ा अवसर साबित हुआ।
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