पाकिस्तान में जारी है भारी सियासी घमासान, इमरान खान के समर्थकों और पुलिस के बीच खूनी संघर्ष विश्व 2 घंटे पहले 6
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने और इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया है जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।

पाकिस्तान में हिंसक हुआ विरोध प्रदर्शन

पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब एक हिंसक मोड़ ले चुका है। सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा सहित देश के कई इलाकों में पुलिस और इमरान खान के समर्थकों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। हालात इस कदर बिगड़ गए कि पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलानी पड़ीं और बल प्रयोग करना पड़ा। वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा की स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है, जहां पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहबाज शरीफ सरकार ने कई प्रभावित क्षेत्रों में सेना की तैनाती करने का निर्णय लिया है।

गवर्नर शासन के बाद बिगड़े हालात

इस पूरे बवाल की मुख्य जड़ खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करना है। इमरान खान की रिहाई के लिए चलाए जा रहे आंदोलन और उनके समर्थकों द्वारा किए जा रहे लॉन्ग मार्च को कुचलने के लिए शहबाज सरकार ने प्रशासन और सुरक्षा बलों की पूरी ताकत झोंक दी है। सरकार ने प्रांत की चुनी हुई सरकार को निलंबित कर दिया है और चीफ मिनिस्टर सुहैल आफरीदी सहित कई मंत्रियों को प्रिवेंटिव कस्टडी में डाल दिया गया है। जब समर्थकों का काफिला इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा था, तो उन्हें शहर में पहुंचने से पहले ही खदेड़ दिया गया। इस कार्रवाई से नाराज होकर इमरान खान के समर्थक सड़कों पर उतर आए और सुरक्षा बलों से उलझ गए। पुलिस पर पथराव की घटनाओं के बाद सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू कर दी।

संकटों में घिरा पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय हर तरफ से गंभीर संकटों से घिरा हुआ है। एक तरफ अफगानिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंध हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ भी रिश्ते सहज नहीं हैं। आर्थिक मोर्चे पर देश की स्थिति पहले ही बदतर है और वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को कर्ज मिलने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन विकट परिस्थितियों के बावजूद, पाकिस्तान की सरकार और सेना का पूरा ध्यान इमरान खान के समर्थकों को दबाने पर केंद्रित है। ऐसा प्रतीत होता है कि सेना को न तो न्यायिक फैसलों की चिंता है और न ही जनता के मिजाज की परवाह। यह हठ शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर, दोनों के लिए आगे चलकर गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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