राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
स्टारलिंक और एलन मस्क को लेकर गहराता विवाद
टेक जगत के दिग्गज और अरबपति एलन मस्क की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक का भारत में प्रवेश इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब इस पूरे मामले में टिप्पणीकार और लेखक एस गुरुमूर्ति ने एलन मस्क के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुमूर्ति का मानना है कि मस्क एक विदेशी नागरिक होने के बावजूद भारत की आंतरिक राजनीति में दखल दे रहे हैं, जो पूरी तरह से अनुचित है। उनका कहना है कि जिस तरह का राजनीतिक झुकाव मस्क ने अन्य देशों में दिखाया है, उसके बाद उन पर भारत के संवेदनशील संचार क्षेत्र में भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
भारत में राजनीति करने का आरोप
एस गुरुमूर्ति ने अपने हालिया सोशल मीडिया संबोधन में एलन मस्क को सीधे तौर पर आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक विदेशी व्यक्ति के तौर पर मस्क को भारत में राजनीति खेलने का कोई अधिकार नहीं है। गुरुमूर्ति के अनुसार, मस्क का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों की घरेलू राजनीति में न केवल हस्तक्षेप किया, बल्कि वहां के जनमानस और शासन प्रणाली को प्रभावित करने का प्रयास भी किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मस्क भारत में भी इसी तरह की राजनीतिक चालें चलेंगे, तो फिर देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संचार नेटवर्क में उन्हें आने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। गुरुमूर्ति ने कहा कि मस्क के बर्ताव से वे एक सफल व्यापारी की तुलना में एक सक्रिय राजनेता अधिक प्रतीत होते हैं।
श्रीधर वेंबू और भारतीय अर्थव्यवस्था का पक्ष
इस विवाद के दौरान जोहो कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर वेंबू के विचारों को भी प्रमुखता से लिया गया। गुरुमूर्ति ने वेंबू के एक पोस्ट को साझा करते हुए मस्क के आरोपों की धज्जियां उड़ाईं। श्रीधर वेंबू ने तर्क दिया था कि भारत में इंटरनेट सेवाएं दुनिया में सबसे अधिक किफायती हैं और भारतीय बाजार अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है। वेंबू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार एकाधिकार को बढ़ावा नहीं देती, बल्कि एक ऐसा पारदर्शी वातावरण तैयार कर रही है जहां स्टार्टअप्स को फलने-फूलने का मौका मिले। वेंबू के अनुसार, भारत सरकार का रुख स्पष्ट है कि किसी भी एक कंपनी के वर्चस्व के बजाय आम उपभोक्ताओं को लाभ मिलना चाहिए, जो कि एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था की निशानी है।
वैश्विक राजनीति में मस्क का हस्तक्षेप
एस गुरुमूर्ति ने एलन मस्क की विवादास्पद राजनीतिक गतिविधियों का विस्तृत विवरण देते हुए कहा कि मस्क का प्रभाव केवल व्यावसायिक हितों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अमेरिका में हुए 2024 के राष्ट्रपति चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि मस्क डोनाल्ड ट्रंप के सबसे बड़े आर्थिक समर्थकों में से एक बनकर उभरे। संघीय चुनाव आयोग के दस्तावेजों का हवाला देते हुए यह कहा गया कि मस्क ने ट्रंप समर्थक समूहों को लगभग 259 मिलियन डॉलर का भारी भरकम दान दिया। इस निवेश ने उन्हें रिपब्लिकन राजनीतिक गलियारों में एक प्रभावशाली ताकत बना दिया। केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन में भी मस्क की टिप्पणियां भारी विवाद का कारण बनीं। उन्होंने ब्रिटेन की न्याय प्रणाली और वहां के प्रशासनिक ढांचे पर हमला करते हुए कीर स्टार्मर सरकार को निशाने पर लिया और इसे तानाशाही की संज्ञा दी।
स्टारलिंक विवाद की असली वजह क्या है?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित स्टारलिंक का मुख्य उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों में उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट पहुंचाना है। मस्क ने भारत में इसके लॉन्च को लेकर काफी उत्सुकता दिखाई थी, लेकिन बात तब बिगड़ गई जब उन्होंने कुछ प्रभावशाली लोगों को ओलिगार्क्स कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि ये लोग स्टारलिंक के भारत प्रवेश में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। भारत सरकार ने मस्क के इन बेबुनियाद आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जानकारों का कहना है कि भारत के दूरसंचार नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना हर कंपनी के लिए अनिवार्य है, और इसी प्रक्रिया को मस्क गलत रंग देकर इसे अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। एस गुरुमूर्ति की टिप्पणी ने अब इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां सुरक्षा और संप्रभुता को तकनीकी विस्तार से ऊपर रखा जा रहा है।
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