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एक घंटा पहले
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विचारों
देश के विख्यात संविधान विशेषज्ञ तथा राजनीति और संसदीय मामलों के गहरे जानकार डॉ. सुभाष सी. कश्यप नहीं रहे। उन्होंने 97 साल की उम्र में अपने आवास पर अंतिम सांस ली। मिली जानकारी के अनुसार, उनका निधन हृदय और फेफड़ों के काम करना बंद कर देने यानी कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट के कारण हुआ। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरी संवेदना व्यक्त की है।
पीएम मोदी ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से गहरा दुःख हुआ है। वे भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनका संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान हमारे समाज के लिए समृद्ध साबित हुआ। लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने के प्रति उनका लेखन और समर्पण सराहनीय था। उनके परिवार और मित्रों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं। ओम शांति।"
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी डॉ. कश्यप के निधन पर अपना शोक प्रकट किया।
37 साल तक रहे संसद से जुड़े
डॉ. सुभाष कश्यप का जन्म 10 मई 1929 को हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1953 में संसद सचिवालय से की थी और करीब 37 सालों तक संसद के साथ जुड़े रहे। वर्ष 1984 से 1990 तक वे देश की 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव के पद पर रहे। इसके साथ ही उन्होंने जिनेवा में 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन' (IPU) का नेतृत्व भी संभाला था।
भारत सरकार के लिए डॉ. कश्यप पंचायती राज कानूनों के सलाहकार की भूमिका में भी रहे। इतना ही नहीं, जब देश के संविधान के कामकाज की समीक्षा हेतु एक राष्ट्रीय आयोग गठित किया गया, तब वे उसके सदस्य होने के साथ-साथ ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। लंबे समय तक उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (INBA) के अध्यक्ष पद का दायित्व भी निभाया।
2015 में मिला था 'पद्म भूषण'
देश और समाज के लिए किए गए उनके उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2015 में उन्हें देश के बड़े नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया था। उनकी लिखी पुस्तकें आज भी विद्यार्थियों और कानून के जानकारों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह काम करती हैं।
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