खेल
2 महीने पहले
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संघर्ष से सफलता तक का सफर
नागौर जिले के ताऊसर गांव की रहने वाली कोशिका देवड़ा ने साबित कर दिया है कि शारीरिक चुनौतियां कभी भी सपनों के आड़े नहीं आतीं। बचपन से ही उनके एक हाथ की कलाई के निचले हिस्से का विकास पूरी तरह नहीं हो पाया था, लेकिन कोशिका ने कभी इसे अपनी बाधा नहीं बनने दिया। आज वह देश की एक होनहार पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।
तुर्की में लहराया परचम
कोशिका का हालिया प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। वर्ष 2026 में तुर्की में आयोजित वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स में उन्होंने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए 1 स्वर्ण और 2 रजत पदक हासिल किए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत का प्रमाण है।
अनुशासन और कड़ी मेहनत
फिलहाल कोशिका हैदराबाद में रहकर अपनी पढ़ाई और खेल को संतुलित कर रही हैं। बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा कोशिका अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर हैं। वह बेहतर परिणाम के लिए प्रतिदिन 8 से 10 घंटे तक अभ्यास करती हैं। अपनी एकाग्रता बनाए रखने के लिए उन्होंने मोबाइल फोन का उपयोग भी सीमित कर दिया है। कोच गौरव खन्ना के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रहीं कोशिका अपनी अकादमी में अन्य सामान्य खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करती हैं, जिससे उन्हें अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
पदकों का सफर
कोशिका अब तक अपने पांच साल के खेल सफर में कुल 15 पदक जीत चुकी हैं, जिनमें 2 स्वर्ण, 6 रजत और 7 कांस्य पदक शामिल हैं। उनके करियर के प्रमुख पदकों का विवरण इस प्रकार है:
- तुर्की वर्ल्ड एबिलिटी स्पोर्ट्स यूथ गेम्स 2026: 1 स्वर्ण और 2 रजत।
- इंडोनेशिया इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन 2024: 1 कांस्य।
- युगांडा इंटरनेशनल पैरा बैडमिंटन 2023: 1 रजत और 1 कांस्य।
- 7वीं नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026: 1 कांस्य।
- यूथ नेशनल पैरा बैडमिंटन 2025: 2 रजत और 1 कांस्य।
- खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2024: 1 कांस्य।
- नेशनल गेम्स 2024: 1 रजत और 1 कांस्य।
- पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप 2023: 1 स्वर्ण और 1 रजत।
शुरुआती दौर में फुटबॉल में रुचि रखने वाली कोशिका ने केरल में पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों को देखने के बाद इस खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया था। उनके इस निर्णय में उनके परिवार ने भी पूरा सहयोग दिया है।
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