तीरंदाजी विश्व कप स्टेज-3: रिकर्व मिश्रित जोड़ी का पदक तय, दीपिका कुमारी की अनदेखी पर मचा बवाल खेल एक घंटा पहले 2
धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद की रिकर्व मिश्रित जोड़ी ने फाइनल में जगह बनाकर भारत का पहला पदक सुनिश्चित कर दिया, मगर टीम स्पर्धाओं से दीपिका कुमारी और अतनु दास को बाहर रखने वाली नई चयन नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में भारत के लिए मिली-जुली खबरें रहीं। एक ओर धीरज बोम्मादेवरा और नई तीरंदाज कुमकुम मोहोद की रिकर्व मिश्रित जोड़ी ने फाइनल में पहुंचकर देश का पहला पदक पक्का कर दिया, तो दूसरी ओर टीम स्पर्धाओं में मिली निराशाजनक नतीजों ने एशियाई खेलों को ध्यान में रखकर बनाई गई चयन नीति को कठघरे में खड़ा कर दिया।

रिकर्व मिश्रित जोड़ी ने दिलाई पहली खुशखबरी

अंताल्या में गुरुवार को धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम मोहोद ने रिकर्व मिश्रित युगल के फाइनल में जगह बनाकर भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया। खिताबी मुकाबले में इस जोड़ी का सामना मजबूत दक्षिण कोरियाई टीम से होगा।

तीसरी वरीयता प्राप्त इस भारतीय जोड़ी ने पहला सेट गंवाने के बाद शानदार वापसी की और सेमीफाइनल में जर्मनी की कैथरीना बाउर तथा मोरित्ज वाइजर को 6-2 से शिकस्त दी। इससे पहले 'बाय' मिलने के बाद उन्होंने डेनमार्क को सीधे सेटों में हराकर अभियान की शुरुआत की थी और क्वार्टर फाइनल में अमेरिका को 6-2 से पराजित किया।

चयन नीति पर उठे तीखे सवाल

टीम स्पर्धाओं में खराब प्रदर्शन के बाद एशियाई खेलों को ध्यान में रखकर तैयार की गई भारत की टीम चयन नीति की कड़ी आलोचना हो रही है। अच्छी क्वालीफिकेशन रैंकिंग के बावजूद पुरुष और महिला रिकर्व टीमें आगे नहीं बढ़ सकीं। बुधवार को कंपाउंड पुरुष और महिला टीमें भी बाहर हो गईं, जिससे यह नई नीति चर्चा का केंद्र बन गई।

इस नीति के तहत सिर्फ उन्हीं तीरंदाजों को उतारा गया जिन्हें एशियाई खेलों की टीम के लिए चुना गया था, भले ही उनके क्वालीफिकेशन नतीजे कुछ भी रहे हों। चार बार की ओलंपियन दीपिका कुमारी को टीम स्पर्धा से बाहर रखा गया, क्योंकि पिछले महीने हुए ट्रायल्स में वह एशियाई खेलों की टीम में जगह नहीं बना सकी थीं।

महिला टीम को क्वार्टर फाइनल में हार

शंघाई में हुए पिछले विश्व कप में दीपिका कुमारी की अगुआई में महिला टीम ने स्वर्ण पदक जीता था, मगर इस बार क्वार्टर फाइनल में मेजबान तुर्की की कम रैंकिंग वाली टीम से 1-5 से हार झेलनी पड़ी।

दीपिका की जगह भारत ने कुमकुम, अंकिता भकत और कीर्ति शर्मा को मैदान में उतारा। क्वालीफिकेशन में कीर्ति 43वें और अंकिता 21वें स्थान पर रहीं। तीसरी वरीयता प्राप्त इस भारतीय तिकड़ी को पहले दौर में 'बाय' मिला और उसने नीदरलैंड्स को 6-0 से रौंदकर शानदार आगाज किया। हालांकि एलिफ गोकिर, दुनिया येनिहायत और कानसे दुरु ताराकसी की तुर्की टीम के सामने संघर्ष करना पड़ा और क्वार्टर फाइनल में 1-5 से शिकस्त मिली। इस बीच दीपिका ने अपना व्यक्तिगत अभियान जारी रखते हुए कुमकुम, अंकिता और कीर्ति के साथ तीसरे दौर में प्रवेश किया।

पुरुष और कंपाउंड टीमों की निराशा

पुरुष टीम शुरुआती दौर में ही बाहर हो गई। ओलंपियन अतनु दास को टीम स्पर्धा के लिए नहीं चुना गया, क्योंकि वह एशियाई खेलों में जाने वाली टीम का हिस्सा नहीं थे। उनकी जगह यशदीप भोग ने धीरज और नीरज चौहान के साथ टीम बनाई। सातवीं वरीयता प्राप्त यह भारतीय टीम शुरुआती दौर में ही अमेरिका से शूटऑफ में 4-5 से हारकर बाहर हो गई।

कंपाउंड वर्ग में भी भारत को दोनों टीम स्पर्धाओं में कोई पदक नहीं मिला। कंपाउंड मिश्रित टीम का सफर भी क्वार्टर फाइनल में थम गया, जहां ज्योति सुरेखा वेन्नम और साहिल जाधव को अमेरिकी खिलाड़ी सवाना ओडोनोहो तथा कर्टिस ब्रॉडनैक्स से 154-156 से हार का सामना करना पड़ा।

आगे क्या

अगले महीने मैड्रिड में होने वाले विश्व कप के चौथे चरण में भी इसी चयन नीति को अपनाए जाने की उम्मीद है। 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची और नागोया में होने वाले एशियाई खेलों से पहले यह आखिरी बड़ा टूर्नामेंट है, जिससे आगामी प्रतियोगिता की तैयारियों पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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