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40 मिनट पहले
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स्कॉटलैंड में गूंजा राजनांदगांव की बेटी का नाम
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की होनहार खिलाड़ी ज्ञानेश्वरी यादव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेते हुए उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश और भारत का मान बढ़ाया है। इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा थी, लेकिन ज्ञानेश्वरी ने अपने मजबूत इरादों और मेहनत के दम पर दूसरा स्थान हासिल कर रजत पदक जीता। इस खबर के सामने आते ही उनके गृह नगर राजनांदगांव के कौरिनभाठा क्षेत्र में जश्न का माहौल है और खेल प्रेमी उन्हें लगातार बधाई दे रहे हैं।
साधारण परिवार से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर
ज्ञानेश्वरी यादव की यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि वह एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता दीपक यादव एक इलेक्ट्रिशियन के रूप में काम करते हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। संसाधनों की कमी के बावजूद परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को कभी कम नहीं होने दिया और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसे हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान किया। ज्ञानेश्वरी के पिता ने एक बातचीत के दौरान बताया कि उनकी बेटी ने इस मुकाम को हासिल करने के लिए बहुत संघर्ष किया है। उन्हें इस बात की खुशी है कि समाज और शहर के लोगों का भरपूर प्यार और आशीर्वाद भी उनकी बेटी को हमेशा मिलता रहा है।
लगातार शानदार प्रदर्शन का ट्रैक रिकॉर्ड
यह पहला मौका नहीं है जब ज्ञानेश्वरी ने पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। उनका खेल का इतिहास बेहद प्रेरणादायक रहा है। इससे पहले भी वह कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। ज्ञानेश्वरी ने सामोआ में आयोजित हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। इसके अलावा, गुजरात में संपन्न हुई एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रोंज और सिल्वर मेडल अपने नाम किए थे। उनकी लगातार मेहनत और खेल के प्रति उनका समर्पण आज के युवाओं के लिए एक बड़े प्रेरणा स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
पिता ने देखा अब अगला बड़ा सपना
अपनी बेटी की इस बड़ी सफलता से गौरवान्वित पिता दीपक यादव की महत्वाकांक्षाएं अब और बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी का लक्ष्य अब और भी ऊंचा है और वह उसे ओलंपिक में मेडल जीतते हुए देखना चाहते हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि अगर ज्ञानेश्वरी को समय रहते सभी जरूरी सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जाते रहे, तो वह जल्द ही ओलंपिक के मंच पर भी भारत के लिए पदक लेकर आएगी। इस उपलब्धि पर जिले के खेल जगत से जुड़े लोग और उनके कोच भी काफी उत्साहित हैं और इसे एक नई शुरुआत मान रहे हैं।
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