ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए भारतीय सेना की बड़ी तैयारी, 52000 करोड़ रुपये के आधुनिक हथियारों से लैस होंगे जवान भारत 2 महीने पहले 69
भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने के लिए रक्षा खरीद परिषद से 52000 करोड़ रुपये के नए हथियारों की मंजूरी प्राप्त कर ली है। इस सौदे के तहत तीनों सेनाओं को ड्रोन, मिसाइल और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मिलेंगे।

दुश्मन को मात देने की नई रणनीति

भारतीय सेना अब अपने अभियानों को और अधिक धारदार बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर 2.0 को एक नई ऊंचाई देने के लिए रक्षा खरीद परिषद यानी डीएसी ने एक बड़ा निर्णय लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में हुई बैठक में लगभग 52000 करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। यह कदम न केवल थल सेना, बल्कि वायुसेना और नौसेना की युद्ध लड़ने की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

थल सेना को मिलने वाले आधुनिक हथियार

इस मेगा रक्षा सौदे के तहत थल सेना को युद्धक्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होने वाले कई उपकरण मिलने जा रहे हैं। इन प्रमुख हथियारों में शामिल हैं:

  • आकाश तरंग एंटी-ड्रोन सिस्टम, जो दुश्मन के हवाई हमलों को विफल करने में सक्षम होगा।
  • मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, जो दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को पल भर में नष्ट कर सकती है।
  • मीडियम रेंज एयर डिफेंस सिस्टम और वी-शॉराड्स एयर डिफेंस सिस्टम, जो सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाएंगे।
  • टैंकों के लिए विशेष एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम और जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन, जो सटीक हमले करने में माहिर हैं।

समुद्र से लेकर आसमान तक सुरक्षा का घेरा

सरकार का मुख्य लक्ष्य यह है कि दुश्मन किसी भी रास्ते से हमला करने की सोचे तो उसे करारा जवाब मिले। वायुसेना के बेड़े में हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट को शामिल करने की योजना बनाई गई है, जिससे निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। वहीं, भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी कई महत्वपूर्ण सौदों को मंजूरी दी गई है। इसमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन के अलावा नेवल शिपबोर्न ड्रोन सिस्टम शामिल हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए नई टेस्टिंग फैसिलिटी भी विकसित की जाएगी, जो भविष्य की नौसैनिक जरूरतों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

युद्ध क्षमता में होगा इजाफा

विशेषज्ञों का मानना है कि इन अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय सशस्त्र बलों की तत्परता में जबरदस्त उछाल आएगा। ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के तहत अब दुश्मन चाहे जमीन पर हो, आसमान में सक्रिय हो या फिर समुद्र के रास्ते घुसपैठ की कोशिश करे, भारतीय सेना उसे तुरंत नेस्तनाबूद करने की स्थिति में होगी। यह रक्षा सौदा न केवल स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की रणनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। आने वाले समय में इन हथियारों की तैनाती से भारतीय सीमाओं की सुरक्षा का दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक और सुरक्षित हो जाएगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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