राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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ऑपरेशन राजीव: सियाचिन की वह खूनी जंग
इतिहास के पन्नों में 21 जून 1987 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन भारतीय सेना ने ऑपरेशन राजीव की शुरुआत की थी। यह मिशन दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा जमाए बैठे दुश्मनों को खदेड़ने के लिए चलाया गया था। भारतीय सैनिकों का लक्ष्य 21,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित 'कायदे पोस्ट' को वापस हासिल करना था, जिसे पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा लिया था।
बर्फ की सीधी दीवार और मौत का मंजर
इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती मौसम और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां थीं। तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे था। नायब सूबेदार बाना सिंह और उनके साथी सैनिकों ने करीब 1500 फीट ऊंची बर्फ की सीधी दीवार पर चढ़ाई की। यह चढ़ाई इतनी कठिन थी कि सामान्य स्थिति में एक सैनिक के बदले नौ सैनिकों की तैनाती की जरूरत पड़ती, लेकिन भारतीय जाबांजों ने हौसले के दम पर इसे मुमकिन कर दिखाया।
दुश्मनों पर काल बनकर टूटे भारतीय सैनिक
दुश्मनों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि भारतीय सेना इतनी ऊंचाई से उन पर धावा बोल सकती है। बाना सिंह और उनकी टुकड़ी ने अचानक हमला करते हुए पाकिस्तानियों के छक्के छुड़ा दिए। दोनों ओर से आमने-सामने की भीषण लड़ाई हुई, जिसमें भारतीय सेना ने जीत दर्ज की।
बाना टॉप के नाम से हुई पहचान
इस अद्भुत वीरता और अदम्य साहस के लिए नायब सूबेदार बाना सिंह को देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा गया। जीत के बाद, उसी रणनीतिक चौकी का नाम बदलकर सम्मानस्वरूप बाना टॉप रख दिया गया, जो आज भी भारतीय शौर्य का प्रतीक बनी हुई है।
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