पश्चिम बंगाल: समंदर के रास्ते घुसपैठ का अड्डा बना नोयाचर आईलैंड, प्रशासन ने जड़ा ताला राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 2
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर स्थित नोयाचर आईलैंड को लेकर खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी है। संदिग्ध गतिविधियों और अवैध घुसपैठ की आशंका के चलते पूरे इलाके में सघन सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।

नोयाचर आईलैंड पर सुरक्षा का घेरा

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित नोयाचर आईलैंड इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद यह बात सामने आई है कि इस द्वीप का इस्तेमाल अवैध तरीके से सीमा पार कर आने वाले लोग कर रहे थे। चारों तरफ से पानी से घिरे इस क्षेत्र को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जब बारीकी से जांच की, तो उन्हें घुसपैठ के नए रास्तों का पता चला, जिसके बाद प्रशासन ने यहां सुरक्षा का घेरा सख्त कर दिया है।

जलमार्ग बना घुसपैठ का जरिया

नोयाचर हल्दिया के करीब हुगली नदी के मुहाने पर बसा एक बड़ा द्वीप है। करीब 64 वर्ग मील में फैले इस इलाके में 7 से 8 हजार की आबादी रहती है, जो मुख्य रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और चारों ओर पानी होने के कारण, अब तक सुरक्षा एजेंसियां इस रास्ते को सुरक्षित मान रही थीं। लेकिन हालिया इनपुट बताते हैं कि इसी जलमार्ग का उपयोग करके बिना वैध दस्तावेजों के बांग्लादेशी नागरिक और अन्य बाहरी अपराधी द्वीप तक पहुंच रहे थे।

पुलिस का सघन सत्यापन अभियान

खुफिया रिपोर्ट के मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरे इलाके में विशेष सत्यापन अभियान छेड़ दिया है। पुलिस की टीमें घर-घर जाकर लोगों के आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। इस अभियान के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • संदिग्ध पाए जाने वाले सभी लोगों से गहन पूछताछ की जा रही है।
  • पुराने निवासियों के दस्तावेजों की भी दोबारा जांच की जा रही है ताकि फर्जी पहचान की पुष्टि हो सके।
  • क्षेत्र में जलमार्ग के जरिए आने वाली हर छोटी-बड़ी नाव और संदिग्ध आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
  • जिलाधिकारी और जिला पुलिस अधीक्षक स्वयं स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर दौरा कर रहे हैं।

क्यों संवेदनशील है नोयाचर?

विशेषज्ञों का मानना है कि नदी और समंदर से घिरे द्वीपों पर निगरानी रखना एक बड़ी चुनौती होती है। हर नाव और व्यक्ति की पहचान करना कठिन होता है, जिसका फायदा उठाकर घुसपैठिए अपनी पैठ बना लेते हैं। प्रशासन का कहना है कि यह मामला केवल स्थानीय सुरक्षा का नहीं, बल्कि तटीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। हालांकि अभी तक प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर बड़ी घुसपैठ की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच जारी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खुफिया रिपोर्ट में जताई गई आशंकाएं कितनी सटीक हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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