सुभासपा ने एनडीए में मांगीं 32 सीटें, आजमगढ़ में सपा के दुर्ग पर निगाह, क्या डगमगाएगा MY गणित? उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 2
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए में 32 सीटों की दावेदारी पेश की है और सपा के मजबूत किले आजमगढ़ में सेंध लगाने की रणनीति बना रही है।

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसी के मद्देनजर बयानबाजी तथा बैठकों का सिलसिला अभी से तेज हो गया है। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने 2027 के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने गठबंधन के भीतर प्रदेश की 32 सीटों पर अपना दावा ठोंका है और उसकी खास नजर समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले आजमगढ़ पर टिकी है।

सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर के अनुसार, पार्टी जमीनी स्तर पर सक्रियता से जुटी हुई है और उसने एनडीए में 32 सीटों पर हिस्सेदारी की मांग रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य सपा के गढ़ आजमगढ़ को अपने कब्जे में लेना है।

अरुण राजभर ने कहा, 'मैं स्वयं अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हूं और वहीं से एनडीए का उम्मीदवार रहूंगा। इस पर बातचीत पूरी हो चुकी है। आजमगढ़ में मेहनगर, दीदारगंज और अतरौलिया सीटों पर सुभासपा ने दावेदारी पेश की है।'

सीटों पर फैसला एनडीए का शीर्ष नेतृत्व करेगा

इस मामले पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि सभी नीतिगत विषयों पर घटक दलों के सम्मानित नेताओं के साथ आपसी विचार-विमर्श के बाद ही एनडीए का शीर्ष नेतृत्व निर्णय लेता है। उन्होंने जोड़ा कि चुनाव के दौरान सीटों को लेकर एनडीए नेतृत्व सुभासपा के नेतृत्व से बातचीत करके आपसी सहमति से फैसला करेगा।

पूर्वांचल में ओपी राजभर का दमखम

सपा पर हमला बोलते हुए अरुण राजभर ने दावा किया कि बीते विधानसभा चुनाव में सपा को जो अतिरिक्त सीटें मिलीं, उनमें बड़ी भूमिका पूर्वी उत्तर प्रदेश में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की ताकत की रही।

2022 में सपा के साथ 19 सीटों पर लड़ा था चुनाव

उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा ने सपा के साथ गठबंधन करके 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि परिणाम आने के कुछ ही महीनों बाद राजभर ने यह गठजोड़ तोड़ दिया और दोबारा एनडीए में लौट आए।

2017 में हासिल हुई थीं 8 सीटें

इस बार राजभर की रणनीति सपा के सबसे प्रमुख दुर्ग आजमगढ़ से ही आकार लेती दिख रही है। इससे पहले 2017 में एनडीए गठबंधन के तहत सुभासपा को 8 सीटें मिली थीं, जिनमें से पार्टी अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर समेत चार सदस्यों ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी।

राजभर बोले- इस बार सपा को सिखाएंगे सबक

ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने दावा किया कि इस मर्तबा पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा को 'सबक सिखाया जाएगा'। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर हैं। अब उन्होंने सपा के सबसे बड़े गढ़ आजमगढ़ और उसके 'एमवाई' यानी मुस्लिम-यादव समीकरण को सीधी चुनौती देनी शुरू कर दी है।

क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव की तैयारियों के बीच अखिलेश यादव के 'पीडीए' यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक नारे की धार कुंद करने में एनडीए की ओर से सबसे आगे राजभर ही नजर आ रहे हैं। वह यादव वर्ग पर हमले के साथ-साथ हिंदुत्व के एजेंडे को प्राथमिकता दे रहे हैं। दो दशक से अधिक की राजनीति में पहली बार वह मुसलमानों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर आक्रामक तेवर अपनाते दिख रहे हैं। एक समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुखर रहे राजभर अब हिंदुत्व के एजेंडे के जरिए उनके सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे हैं। जानकार इसे राजभर की सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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