क्या बिखर जाएगी ममता की पार्टी? बैठक में जुटे महज 8 विधायक और 6 सांसद, हुमायूं कबीर ने दिया चौंकाने वाला ऑफर पश्चिम बंगाल एक घंटा पहले 3
तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बीच ममता बनर्जी की बुलाई बैठक में 78 में से सिर्फ 8 विधायक और 42 में से केवल 6 सांसद ही पहुंचे। ममता ने पार्टी का ढांचा बदला, वहीं हुमायूं कबीर ने उन्हें रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दे दिया।

तृणमूल कांग्रेस में उठे बगावत के तूफान के बाद आखिरकार आज ममता बनर्जी मोर्चे पर सक्रिय दिखाई दीं। उन्होंने पार्टी के विधायकों और सांसदों की बैठक बुलाई, मगर हालात ने उनकी चिंता और बढ़ा दी। तृणमूल के 78 में से केवल 8 विधायक और 42 सांसदों में से सिर्फ 6 सांसद ही इस बैठक तक पहुंचे। इसी बैठक में ममता ने संगठन को नए सिरे से ढालने का निर्णय लिया और अपने करीबी नेताओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। अभिषेक बनर्जी पार्टी के महासचिव बने रहेंगे, जबकि उनके साथ डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को संयुक्त सचिव की कमान दी गई है। पश्चिम बंगाल में प्रदेश अध्यक्ष पद से सुब्रतो बख्शी की छुट्टी कर दी गई और उनकी जगह चंद्रिमा भट्टाचार्य को स्टेट प्रेसिडेंट बनाया गया है।

संगठन में किए गए कई फेरबदल

सयानी घोष को टीएमसी की यूथ विंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं महिला मोर्चे की कमान माला राय के हाथ में दी गई है। मदन मित्रा को ट्रेड यूनियन का प्रभार मिला है। ममता बनर्जी ने डेरेक ओ ब्रायन और कल्याण बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया है, जबकि कुणाल घोष समेत तीन अन्य नेता प्रदेश प्रवक्ता की भूमिका निभाएंगे। बैठक के समाप्त होते ही कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के इशारे पर तृणमूल विधायक दल को तोड़ने की साजिश रची गई है। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाकर गैरकानूनी कदम उठाया है और पार्टी स्पीकर के इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।

कल्याण बनर्जी का ऋतब्रत पर पलटवार

बागी विधायकों की बयानबाजी पर कल्याण बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग आज इधर-उधर की बातें कर रहे हैं, वे स्पीकर के पास जाने से पहले दीदी से चर्चा कर सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो खुद को ममता से बड़ा नेता मान बैठे हैं, वे एक बार अपने इलाके में जाकर अपने नाम पर चुनाव लड़कर देखें, तभी उन्हें अपनी असली हैसियत का पता चलेगा। दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट के विधायक प्रसून बनर्जी ने जवाबी हमला बोला। उनका कहना था कि अभिषेक बनर्जी ने विधायकों के जाली हस्ताक्षर के सहारे नेता प्रतिपक्ष चुनने की पूरी प्रक्रिया को उलझा दिया था। उन्होंने दावा किया कि अगर ऋतब्रत बनर्जी समय रहते कदम न उठाते और 60 विधायक मिलकर विपक्ष का नया नेता न चुनते, तो यह पद भी तृणमूल के हाथ से निकल जाता।

बैठक में पहुंचे केवल 8 विधायक और 6 सांसद

सूत्रों के मुताबिक आज ममता बनर्जी ने कुछ बागी विधायकों से संपर्क साधकर उन्हें मनाने की कोशिश भी की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी। यही वजह रही कि बैठक में सिर्फ 8 विधायक और 6 सांसद ही नजर आए। इसके बाद यह चर्चा भी जोर पकड़ने लगी कि आने वाले दिनों में कुछ और विधायक ममता का साथ छोड़ सकते हैं और कुछ सांसद भी पाला बदल सकते हैं। जब इस बारे में मदन मित्रा से सवाल किया गया तो उन्होंने सफाई दी कि आज नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक थी, जिसमें कुछ नेता वर्चुअली जुड़े और कुछ बाहर होने के कारण शामिल नहीं हो सके। उनके अनुसार नेताओं की गैर-मौजूदगी कोई बड़ी बात नहीं है, पार्टी में अब सब ठीक है और जो खामियां हैं, उन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा।

क्या तैयार हो गया 23 सांसदों का गुट?

मदन मित्रा भले ही सब कुछ सामान्य बता रहे हों, लेकिन बंगाल में यह चर्चा तेज है कि तृणमूल के सांसद भी बगावत की तैयारी में जुटे हैं। कहा जा रहा है कि 23 सांसदों का एक गुट खड़ा हो चुका है, जो अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने के लिए राजी नहीं है। बंगाल में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने आज कहा कि तृणमूल सांसद आगे क्या करेंगे, इसकी ज्यादा जानकारी तो नहीं है, पर कुछ न कुछ चल जरूर रहा है और जल्द ही सामने आ जाएगा। वहीं 23 सांसदों की बगावत को लेकर पूछे जाने पर कल्याण बनर्जी ने इसे महज हवा-हवाई बातें करार दिया। उनका कहना था कि इनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है, तृणमूल के सांसद ममता के साथ खड़े हैं और ममता ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं।

क्या ममता का साथ देंगे हुमायूं कबीर?

इन सबके बीच सबसे चौंकाने वाला बयान हुमायूं कबीर की ओर से आया। उन्होंने आज ममता बनर्जी को रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दे दिया। हुमायूं कबीर दो सीटों से चुनाव जीते थे और रेजीनगर सीट छोड़ने के कारण वहां उपचुनाव होने हैं। इस सीट पर उन्होंने पहले अपने बेटे को चुनाव लड़ाने का ऐलान किया था, लेकिन आज उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी उनसे आग्रह करें, तो वे अपने बेटे को मैदान से हटा लेंगे। उनके मुताबिक वे ममता का समर्थन करेंगे और उन्हें रेजीनगर से चुनाव जिताकर विधानसभा भेजेंगे।

ममता को सता रहा पार्टी बिखरने का डर

यह स्थिति ममता बनर्जी के लिए कितनी असहज होगी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस हुमायूं कबीर को उन्होंने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था, वही आज अपनी सीट उन्हें ऑफर कर रहे हैं। दीदी को अहसास है कि तृणमूल कांग्रेस बिखरने की कगार पर है। बैठक बुलाने पर न विधायक पहुंच रहे हैं और न सांसद। ममता ने संगठन में बदलाव इसलिए किए हैं ताकि पार्टी पर उनकी पकड़ बनी रहे, क्योंकि कई जगहों पर कार्यकर्ता जनता के गुस्से से घबराकर तृणमूल छोड़कर भाग रहे हैं। ऐसे में अगर लोकसभा के सांसदों ने भी किनारा कर लिया, तो यह ममता के लिए बेहद शर्मिंदगी भरा क्षण होगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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