संसद का मानसून सत्र: 'वन नेशन वन इलेक्शन' पर फिलहाल विराम, सरकार की प्राथमिकता में महिला आरक्षण और परिसीमन भारत एक महीने पहले 60
संसद के आगामी मानसून सत्र के दौरान सरकार 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक को पेश नहीं करेगी, बल्कि उसका पूरा ध्यान महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने पर है।

मानसून सत्र की प्राथमिकताएं तय

सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र को लेकर सरकार ने अपनी कार्ययोजना स्पष्ट कर दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से चर्चा में रहा 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक इस सत्र का हिस्सा नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इस बड़े बदलाव के लिए अभी काफी समय शेष है, क्योंकि इसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2029 के आम चुनाव हैं, जिसमें अभी 3 साल का लंबा वक्त बाकी है। सरकार की वर्तमान प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाना है। परिसीमन विधेयक को लेकर स्थिति अगले एक या दो दिनों में पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी कि क्या इसे इसी सत्र में सदन के पटल पर रखा जाएगा या नहीं।

मंत्रिपरिषद की बैठक में मंथन

मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। मंत्रियों के इस समूह की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान, किरण रिजिजू, जेडीयू नेता ललन सिंह, टीडीपी के राम मोहन नायडू और आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी शामिल हुए। सरकारी रणनीतिकारों का यह मानना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक जैसे मुद्दों पर विपक्षी खेमे में भी कई दल सरकार का समर्थन कर सकते हैं, जिससे कांग्रेस पार्टी संसद में अलग-थलग पड़ सकती है।

विपक्ष की चुनौती और डीएमके का रुख

सरकार की योजनाओं के जवाब में विपक्षी पार्टियां भी अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं। डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन फिलहाल लंदन में हैं, जहां से उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन किया। डीएमके ने स्पष्ट किया है कि यदि परिसीमन विधेयक अपने वर्तमान स्वरूप में पेश किया जाता है, तो पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी। डीएमके नेता सरवनन अन्नादुरई के अनुसार, यह विधेयक तमिलनाडु के हितों के विपरीत है। उनका तर्क है कि मौजूदा प्रारूप से दक्षिण भारतीय राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में कमी आएगी। हालांकि, सरकार ने इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है, लेकिन यदि तमिलनाडु के हितों पर आंच आई तो डीएमके कड़ा रुख अपनाएगी।

दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताएं

परिसीमन विधेयक के खिलाफ दक्षिण भारत की पार्टियां सबसे अधिक मुखर हैं। इन पांच राज्यों के नेताओं को डर है कि इससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा। कांग्रेस सांसद कार्तिकेय चिदंबरम ने भी इस मुद्दे पर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि परिसीमन से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की खाई और अधिक गहरी हो जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य प्रशासनिक समस्या की ओर भी इशारा किया। कार्तिकेय चिदंबरम ने कहा कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सांसद होने के बावजूद सदन में सभी को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सीटों की संख्या बढ़कर साढ़े आठ सौ हो जाती है, तो अधिकतर सांसद सदन में केवल मूक दर्शक बनकर ही रह जाएंगे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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