क्या रात में सीटी बजाने से सच में आ जाती है आत्मा? भारत के अलावा जापान, कोरिया और अमेरिका में भी प्रचलित हैं ऐसी धारणाएं धर्म एक महीने पहले 16
रात के समय सीटी बजाने को लेकर भारत समेत दुनिया के कई देशों में अलग-अलग मान्यताएं चली आ रही हैं। इनके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, मगर सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक कारणों की चर्चा जरूर होती है।

"रात के वक्त सीटी मत बजाओ, वरना कोई अनहोनी हो जाएगी" — बचपन में घर के बड़े-बुजुर्गों के मुंह से यह बात बहुत से लोगों ने जरूर सुनी होगी। कुछ इलाकों में माना जाता है कि सीटी की आवाज से आत्माएं खिंची चली आती हैं, तो कहीं इसे दुर्भाग्य को न्योता देने वाली आदत समझा जाता है। दिलचस्प पहलू यह है कि यह सोच सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।

जापान, दक्षिण कोरिया, फिलीपींस और अमेरिका के भी कई हिस्सों में रात के समय सीटी बजाने को लेकर तरह-तरह की लोक धारणाएं प्रचलित हैं। आज के डिजिटल दौर में, जब हर बात के पीछे वैज्ञानिक वजह तलाशी जाती है, तब भी इस तरह की मान्यताएं लोगों के बीच कायम हैं।

क्या वाकई कोई संबंध है?

असली सवाल यह है कि क्या सचमुच रात में सीटी बजाने और आत्माओं के आने के बीच कोई रिश्ता है, या फिर इसके पीछे समाज और संस्कृति की कोई अलग ही कहानी छिपी हुई है? इन धारणाओं का कोई वैज्ञानिक आधार भले न हो, लेकिन इनके पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यवहारिक कारणों की बात अक्सर होती रहती है।

भारत से लेकर दुनिया तक क्यों फैली यह मान्यता?

भारत के कई राज्यों में रात के समय सीटी बजाना लंबे समय से अशुभ माना जाता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की धारणा रही है कि अंधेरा घिर आने के बाद बेवजह की आवाजें आसपास मौजूद नकारात्मक शक्तियों को अपनी ओर खींच सकती हैं।

यह विश्वास मुख्य रूप से धार्मिक भावनाओं और लोककथाओं पर टिका रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि ऐसी ही सोच दुनिया के कई और देशों में भी देखने को मिलती है, भले ही उनका रूप अलग-अलग हो।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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