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एक घंटा पहले
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खबरों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ़ के बीच एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। यह शुरुआती समझौता दोनों देशों के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाने और दुनिया भर में तेल की आवाजाही के लिहाज़ से बेहद अहम रास्ते होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने को लेकर है। अनुमान है कि इस समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में दस्तखत किए जाएंगे, हालांकि अभी कई पहलू स्पष्ट नहीं हैं। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस डील पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है और देशवासियों से दो टूक कहा है कि संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है।
ट्रंप पर नेतन्याहू का बयान
अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस डील से नेतन्याहू असहज नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मेरी राय हर मुद्दे पर एक जैसी हो, ऐसा हमेशा जरूरी नहीं है। वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं। इजरायल की सुरक्षा से जुड़े हितों की जिम्मेदारी मुझ पर है और इसे समझदारी के साथ निभाना बेहद जरूरी है।"
नेतन्याहू का देशवासियों के नाम संदेश
नेतन्याहू ने अपने नागरिकों को संबोधित करते हुए संदेश जारी किया। उन्होंने लिखा- "इज़राइल के प्यारे नागरिकों, दशकों से मैं ईरान की परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों के खिलाफ लड़ता आ रहा हूं। इसे मैं अपने जीवन का मिशन मानता हूं। आज तक मैंने इस चुनौती का सामना किया है और आगे भी करता रहूंगा। समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे- न आज और न कल। जब तक मैं इज़राइल का प्रधानमंत्री हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा।"
'हमने क्या हासिल किया'- गिनाईं उपलब्धियां
नेतन्याहू ने कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि आखिर हमने हासिल क्या किया, और इसी सवाल का जवाब उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से दिया-
- पूरी तरह खत्म हो जाने के तत्काल खतरे को टाल दिया।
- अपने अमेरिकी मित्रों के साथ मिलकर इज़राइल के इतिहास का सबसे बड़ा आक्रामक हवाई अभियान चलाया।
- परमाणु वैज्ञानिकों को खत्म किया, आतंकी शासन के नेताओं को हटाया, परमाणु ठिकानों को ध्वस्त किया तथा मिसाइलों और उन्हें बनाने वाली अधिकांश फैक्ट्रियों को तबाह कर दिया।
- अनगिनत सैन्य उद्योगों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया, ईरान की नौसेना और वायु सेना को नष्ट किया तथा ईरानी जनता का नरसंहार करने वाले बासिज कमांडरों का सफाया किया।
- भारी नुकसान पहुंचाया। हमारा अनुमान है कि यह क्षति सैकड़ों अरब डॉलर की है और कुछ लोग तो इसे एक ट्रिलियन डॉलर के करीब मानते हैं।
- ईरान की उस अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान पहुंचाया, जिसे खड़ा करने में उन्हें दशकों लगे थे।
- इज़राइल को परमाणु हमले से पूरी तरह तबाह होने के खतरे से बचाया, क्योंकि यह समझना जरूरी है कि 'ऑपरेशन राइज़िंग लायन' से ठीक पहले ईरान तेजी से परमाणु हथियार बनाने में जुटा था और अपने मिसाइल व परमाणु उद्योग को ज़मीन के बहुत नीचे छिपाने की होड़ में था।
ईरान को लेकर नेतन्याहू की चेतावनी
नेतन्याहू ने कहा कि अगर सही समय पर और पूरी ताकत के साथ कार्रवाई न की जाती तो 'ऑपरेशन राइज़िंग लायन' और बाद में 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' में राष्ट्रपति ट्रंप तथा अमेरिकी सेना के साथ ऐतिहासिक सहयोग संभव न होता, और तब तक ईरान के पास परमाणु बम आ चुके होते। उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि लाखों इज़राइली नागरिक, जो इस वक्त मुझे सुन रहे हैं, बड़े पैमाने पर मौत के भयानक खतरे में होते। हम सभी उस खतरे में होते। इज़राइल की आबादी के मिटने के इस खतरे को हमने आने वाले कई सालों के लिए टाल दिया है। यही हमने हासिल किया है और इज़राइल को पूरी तरह खत्म होने से बचाया है।"
'अभी खत्म नहीं हुआ है यह संघर्ष'
देशवासियों को सतर्क करते हुए नेतन्याहू ने कहा, "इज़राइल के नागरिकों, मैं आपसे कहता हूं कि यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। हमें अपनी सतर्कता बनाए रखनी होगी, मजबूत बने रहना होगा और जरूरत पड़ने पर अपनी रक्षा के लिए दृढ़ रहना होगा। यह बात सिर्फ ईरान पर ही लागू नहीं होती, बल्कि ईरान के उन आतंकी सहयोगियों पर भी लागू होती है जिन पर हमने अभूतपूर्व तरीके से प्रहार किया है। हमने गाज़ा में ऐसा किया, लेबनान में किया, सीरिया और यमन में किया, जूडिया तथा सामरिया के शरणार्थी कैंपों में भी ऐसा किया- हर जगह ऐसा किया।"
हमास के नेताओं और बंधकों को लेकर बयान
नेतन्याहू ने आगे कहा, "हमने देइफ़, हनियाह और सिनवार समेत हमास के कई नेताओं को खत्म कर दिया। दरअसल, उस भयानक नरसंहार के समय जो लोग वहां मौजूद थे, उनमें से लगभग सभी को खत्म किया जा चुका है। मेरे ख्याल से बस एक और बचा है, उसका भी सफाया कर दिया जाएगा। हमने हजारों आतंकवादियों और अनगिनत आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। हमने गाज़ा से अपने सभी बंधकों को एक-एक करके वापस लाया। किसी को यकीन नहीं था कि हम ऐसा कर पाएंगे, लेकिन मुझे पूरा भरोसा था।"
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