नैनीताल: करोड़ों फूंकने के बाद भी बदहाल है ऐतिहासिक सूखाताल झील, UKSLSA ने नगर पालिका को दी कड़ी चेतावनी उत्तराखंड एक महीने पहले 52
उत्तराखंड के नैनीताल में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सूखाताल झील की दुर्दशा पर उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने कड़ा रुख अपनाया है और नगर पालिका को तुरंत व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं।

नैनीताल की प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सूखाताल झील को संवारने के नाम पर करोड़ों रुपये तो बहा दिए गए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद निराशाजनक है। सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच यह झील वर्तमान में गंदगी, टूटे हुए वॉकिंग ट्रैक और अवैध पार्किंग का अड्डा बनकर रह गई है। इस गंभीर अव्यवस्था और लापरवाही पर अब उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (UKSLSA) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। प्राधिकरण ने स्थानीय नगर पालिका को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

लापरवाही पर भड़का उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण

UKSLSA के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने सूखाताल की दुर्दशा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर नगर पालिका प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा है कि इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल को सहेजने में भारी लापरवाही बरती जा रही है। प्राधिकरण ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि इस वैश्विक धरोहर को बचाने के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो जिम्मेदार विभाग के खिलाफ खुद प्राधिकरण द्वारा कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पर्यटन हब बनने की थी क्षमता, बना दी बदहाली की पहचान

सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी के अनुसार, सूखाताल झील में नैनीताल के पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की पूरी क्षमता है। यदि इस महत्वपूर्ण धरोहर का सही ढंग से संरक्षण और रखरखाव किया जाए, तो यह मुख्य नैनी झील की तरह ही पर्यटकों के लिए एक बहुत बड़ा आकर्षण और वैश्विक पर्यटन केंद्र बन सकती है। लेकिन प्रशासनिक अनदेखी के कारण करोड़ों रुपये का बजट खर्च करने के बाद भी यह स्थल अपनी पहचान खोता जा रहा है।

सूखाताल झील की प्रमुख समस्याएं

झील के सौंदर्यीकरण के दावों की पोल खोलती कई प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:

  • गंदगी का अंबार: झील क्षेत्र और उसके आसपास भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा जमा है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।
  • क्षतिग्रस्त वॉकिंग ट्रैक: पर्यटकों के चलने के लिए बनाया गया वॉकिंग ट्रैक कई जगहों से पूरी तरह टूट चुका है, जिससे यहां टहलना खतरनाक हो गया है।
  • अवैध पार्किंग: झील के संवेदनशील क्षेत्रों में बेतरतीब तरीके से अवैध रूप से वाहन खड़े किए जा रहे हैं, जिससे इस प्राकृतिक स्थल का मूल स्वरूप बिगड़ रहा है।

प्राधिकरण ने नगर पालिका को इन सभी समस्याओं का समय रहते तुरंत समाधान करने और झील को उसके स्वच्छ स्वरूप में वापस लाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने को कहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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