Nainital में पर्यटकों की परेशानी: बढ़ती भीड़ और जाम से बिगड़ा टूरिस्ट सीजन उत्तराखंड एक महीने पहले 50
Nainital घूमने आए पर्यटक भारी भीड़, बसों की कमी और बढ़ी हुई कीमतों के कारण परेशान हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोग अब इसे सुकून की जगह तनाव का कारण बता रहे हैं।

पर्यटकों की बढ़ती मुश्किलें

सरोवर नगरी Nainital में इस समय पर्यटन सीजन अपने पूरे जोर पर है। वीकेंड पर भारी संख्या में पर्यटकों के पहुंचने से यहां की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। तल्लीताल रोडवेज बस स्टेशन पर स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां यात्रियों को घंटों बसों का इंतजार करना पड़ रहा है। बस के आते ही सीट पाने के लिए धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। कई लोग तो खिड़कियों के जरिए अपने बच्चों और सामान को बस के अंदर भेजने के लिए मजबूर हैं।

तनाव लेकर लौटने को मजबूर पर्यटक

दिल्ली से आई पर्यटक रक्षा ने बताया कि वे करीब ढाई घंटे से बस का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले अब यहां की व्यवस्थाएं काफी बिगड़ चुकी हैं। पर्यटकों का आरोप है कि टैक्सी चालक भी स्थिति का फायदा उठा रहे हैं और हल्द्वानी या काठगोदाम जाने के लिए 500 रुपये प्रति व्यक्ति तक किराया मांग रहे हैं। एक अन्य पर्यटक प्रिया ने बताया कि वे तीन घंटे से स्टेशन पर खड़ी हैं, लेकिन बस न मिलने से परेशान हैं। पर्यटक रवि का कहना है कि होटलों के दाम भी आसमान छू रहे हैं और कई होटलों में कमरों का किराया 7 से 8 हजार रुपये तक पहुंच गया है।

क्या कहता है प्रशासन

यातायात व्यवस्था पर बात करते हुए Nainital रोडवेज स्टेशन की अधीक्षक विमला रौतेला ने बताया कि उपलब्ध संसाधनों के बीच बसों का संचालन पूरी क्षमता से किया जा रहा है। उनके अनुसार:

  • सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बसें चलाई जा रही हैं।
  • वर्तमान में करीब 50 बसों का संचालन किया जा रहा है।
  • जो बसें पहले दो चक्कर लगाती थीं, अब वे तीन-तीन चक्कर लगा रही हैं।
  • ट्रैफिक जाम के कारण बसों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
  • भवाली से चलने वाली बसें जो दोपहर 12 बजे निकलती हैं, वे जाम के कारण शाम साढ़े चार बजे तक Nainital पहुंच पा रही हैं।

अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा में बसों की तैनाती के कारण स्थानीय रूटों पर भी दबाव काफी बढ़ गया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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