नागौर की ऐतिहासिक जल धरोहरों का होगा कायाकल्प, 10.23 करोड़ की लागत से संवरेंगे तालाब राजस्थान एक महीने पहले 39
नागौर के तीन प्रमुख ऐतिहासिक तालाबों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए सरकार ने 10.23 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना से शहर की जल धरोहरों को नई पहचान मिलेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

ऐतिहासिक तालाबों को मिलेगी नई पहचान

नागौर शहर की पहचान रहे प्राचीन जल स्रोतों के दिन अब बदलने वाले हैं। प्रशासन ने शहर के तीन प्रमुख तालाबों, गिनाणी, समस और दुलैया के जीर्णोद्धार के लिए 10.23 करोड़ रुपये की विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इन ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक रूप देते हुए उनके मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है।

परियोजना के मुख्य कार्य

इस विकास कार्य के तहत तालाबों के आसपास के पूरे परिवेश को बदला जाएगा। परियोजना में शामिल प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचा: तालाबों के चारों ओर बेहतर सुविधाएं विकसित की जाएंगी ताकि आमजन को घूमने-फिरने का अच्छा वातावरण मिले।
  • पर्यावरण संरक्षण: जलाशयों के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने के लिए विशेष पर्यावरणीय कार्य किए जाएंगे।
  • जल प्रबंधन: संरक्षण कार्यों के जरिए जल संचयन क्षमता को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

पर्यटन और संस्कृति का केंद्र

नागौर के इन तालाबों का दशकों पुराना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस कायाकल्प से शहर की खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे। जब यह परियोजना पूरी होगी, तो ये स्थल केवल जल भंडारण के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि ये शहर में पर्यटन और बेहतर जल प्रबंधन के प्रमुख केंद्रों के रूप में उभरकर सामने आएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही शहर की विरासत को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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