पटना में पहली बारिश ने ही खोली नगर निगम की पोल, जलभराव से बेहाल हुए कई इलाके बिहार एक महीने पहले 51
पटना में शनिवार को हुई मानसून की पहली बारिश के बाद कई इलाकों में भारी जलभराव हो गया है। वार्ड 62 और 68 में सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने से आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को हुई मानसून की पहली ही बारिश ने प्रशासन के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। नगर निगम की ओर से मानसून से निपटने के लिए जो तैयारियां की गई थीं, वे पहली ही बौछार में पूरी तरह हवा हो गईं। शहर के कई इलाकों में सड़कों पर भारी जलभराव हो गया है, जिससे ऐसा लग रहा है मानो सड़कें नहीं बल्कि कोई तालाब बह रहा हो। इस मामूली बारिश ने ही स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है और उनका दैनिक जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।

इन इलाकों में टापू जैसे बने हालात

बारिश के बाद पटना नगर निगम के वार्ड संख्या 62 के अंतर्गत आने वाले कई क्षेत्रों में स्थिति बेहद खराब हो गई है। खासकर बाहरी बेगमपुर मंडई इलाके में चारों तरफ पानी भर जाने के कारण लोगों का घरों से निकलना भी दूभर हो गया है। इसी तरह की बदहाली वार्ड संख्या 68 में भी देखने को मिल रही है, जहां मथनी तल रेलवे ओवर ब्रिज पुल के नीचे आने-जाने वाले रास्ते में भारी जल-जमाव हो गया है। इस मार्ग पर पानी भर जाने से यहां से गुजरने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों को बेहद कष्टदायक स्थिति से गुजरना पड़ रहा है।

दावों और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन और सरकार की तरफ से विकास के बड़े-बड़े वादे तो किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर उनकी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। मामूली सी बारिश में भी पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। हालांकि, जल निकासी की समस्या को दूर करने के लिए पटना नगर निगम द्वारा दो वाटर पंप लगाए गए हैं, लेकिन ये नाकाफी साबित हो रहे हैं और लोगों को इस समस्या से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। नागरिकों को इस जलभराव के बीच घुटने भर पानी में से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे यातायात व्यवस्था भी पूरी तरह चरमरा गई है।

सफाई अभियान की खुली पोल और स्थाई समाधान की मांग

मानसून के आगमन से पहले नगर निगम द्वारा नाला सफाई और जलभराव से निपटने के लिए चलाए जाने वाले अभियान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। धरातल पर नालियां चोक पड़ी हैं, जिसके कारण पानी की सही निकासी नहीं हो पाती। इसके अलावा, शहर के विभिन्न हिस्सों में नालों की गलत बनावट और बिना किसी ठोस योजना के किए गए निर्माण कार्य ने इस समस्या को और अधिक गंभीर बना दिया है। हर साल मानसून में लोगों को इसी तरह की मुसीबतें झेलनी पड़ती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है।

क्यूआरटी और डिजिटल मॉनिटरिंग के दावों पर उठे सवाल

अब जब स्थिति बेकाबू हो चुकी है, तो नगर निगम की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया टीमों यानी QRT और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था का हवाला दिया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इन तकनीकों के माध्यम से जलभराव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और राहत कार्य किए जा रहे हैं। लेकिन स्थानीय जनता का गुस्सा इस बात पर फूट रहा है कि हर साल उन्हें एक ही तरह की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। बिना किसी स्थाई और ठोस नीति के, केवल तात्कालिक उपायों के भरोसे शहर को छोड़ दिया गया है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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