बिहार
2 घंटे पहले
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सरकारी लापरवाही का बड़ा मामला
बिहार के मुंगेर जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और गंभीर तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी व्यवस्था और स्वास्थ्य वितरण प्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंगेर के टेटिया बंबर इलाके में बच्चों को दी जाने वाली आयरन सिरप की हजारों बोतलें नदी के किनारे झाड़ियों में फेंकी हुई मिलीं। यह मामला तब प्रकाश में आया जब स्थानीय ग्रामीणों ने वहां भारी मात्रा में दवाओं का जखीरा देखा और तुरंत इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने इन सभी बोतलों को जब्त कर लिया है, लेकिन अब यह सवाल हर किसी के जहन में है कि आखिर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बनी ये जीवन रक्षक दवाएं वहां तक कैसे पहुंचीं और बच्चों तक क्यों नहीं पहुंचाई गईं।
घटनास्थल का विवरण और दवाओं की संख्या
यह पूरा घटनाक्रम टेटिया बंबर प्रखंड मुख्यालय के पास का है। बताया जा रहा है कि सीडीपीओ कार्यालय से महज 200 गज की दूरी पर स्थित महानी नदी के किनारे इन दवाओं को फेंका गया था। स्थानीय लोगों की सतर्कता के कारण यह खुलासा हो पाया कि बच्चों के लिए आवंटित इन सरकारी दवाओं को कूड़े की तरह फेंक दिया गया है। मौके पर पहुंचे टेटिया बंबर के थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने अपनी टीम के साथ पहुंचकर इन सभी बोतलों को अपने कब्जे में लिया और थाने ले गए।
पुलिस के अनुसार, जब्त की गई दवाओं की कुल संख्या काफी अधिक है। इसमें 1540 बोतलें 'आयरन एंड फोलिक एसिड सिरप' की हैं, जबकि 'फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड सिरप' की 1835 बोतलें बरामद हुई हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर करीब 3375 बोतलों को वहां से बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिल रहे हैं कि इन दवाओं की एक बड़ी खेप की मियाद यानी एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल
यह दवाएं बच्चों में एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने के लिए पोषण अभियान और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित की जानी थीं। पीएचसी टेटिया बंबर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंसार अहमद ने स्पष्ट किया है कि ये दवाएं स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही मुहैया कराई गई थीं, जिन्हें नियमानुसार सीडीपीओ कार्यालय को रिसीव कराया गया था। दवाओं के बैच नंबर और रिकॉर्ड के मिलान से यह स्पष्ट हो रहा है कि ये दवाएं सीडीपीओ कार्यालय से ही संबंधित हैं।
दूसरी ओर, सीडीपीओ अमन कुमार का इस मामले पर कहना है कि विभाग की ओर से सेविकाओं को वितरण के लिए दवाएं उपलब्ध करवा दी जाती हैं। हालांकि, इतनी भारी मात्रा में दवाएं एक्सपायर होने तक स्टॉक में क्यों पड़ी रहीं और अंत में उन्हें नदी किनारे फेंकने की नौबत क्यों आई, इसका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।
जांच और आगे की कार्रवाई
इस पूरे मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। मुख्य रूप से अब तीन बिंदुओं पर गहन जांच की जा रही है:
- क्या ये दवाएं बच्चों तक जानबूझकर नहीं पहुंचाई गईं और इसे वितरण में लापरवाही बरती गई?
- अगर दवाएं एक्सपायर हो गई थीं, तो उन्हें सरकारी नियमों के तहत नष्ट करने के बजाय खुले में नदी किनारे किसने फेंका?
- इस पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी कौन हैं?
पुलिस का कहना है कि बरामद की गई बोतलों की गहन गिनती की जा रही है और घटना के हर पहलू की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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