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4 घंटे पहले
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चुनाव आयोग का जवाब और स्थिति स्पष्टीकरण
गोवा के चुनावी माहौल में इन दिनों वोटर लिस्ट को लेकर विवाद गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का दावा है कि एसआईआर यानी SIR प्रक्रिया के माध्यम से आगामी चुनावों को प्रभावित करने और हेरफेर करने की साजिश रची जा रही है। इन आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने एक आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि फरवरी 2026 में जारी अंतिम मतदाता सूची में 97 मामले ऐसे थे जिन्हें शामिल नहीं किया गया था। इन मामलों के लिए बीएलओ यानी BLO ने घर-घर जाकर फॉर्म 6 भरवाने की प्रक्रिया संपन्न की है। इनमें से अधिकांश लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों पर अभी काम चल रहा है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर नहीं किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष है।
कांग्रेस का बड़ा आरोप: आयोग बीजेपी का हिस्सा
विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे पर मुखर हैं। कांग्रेस ने उन रिपोर्ट्स का हवाला दिया है जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR के तहत गोवा और अन्य क्षेत्रों में नाम हटाने के मसले पर चिंता जाहिर की थी। गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कवथंकर ने पणजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि बीजेपी को भली-भांति पता है कि गोवा जैसे राज्यों में सत्ता में दोबारा वापसी करना उनके लिए आसान नहीं है। इसी घबराहट में वे SIR का सहारा ले रहे हैं। सुनील कवथंकर ने आरोप लगाया कि वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाना सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी करने जैसा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भारतीय चुनाव आयोग अब बीजेपी की एक शाखा की तरह काम कर रहा है, जिसका उपयोग केवल सत्ता हासिल करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाए क्योंकि देश भर में मिल रहे समर्थन से बीजेपी डरी हुई है।
गोवा फॉरवर्ड पार्टी ने की प्रक्रिया रद्द करने की मांग
इस पूरे मामले पर गोवा फॉरवर्ड पार्टी यानी जीएफपी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि मृत घोषित किए गए व्यक्तियों को छोड़कर बाकी सभी हटाए गए मतदाताओं के नाम तुरंत प्रभाव से मतदाता सूची में बहाल किए जाएं। सरदेसाई का दावा है कि इस विवादित प्रक्रिया के दौरान करीब 1.8 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने तर्क दिया कि गोवा में जीत-हार का अंतर बहुत मामूली होता है, जहां कई बार नतीजे 100 से भी कम वोटों के फासले से तय होते हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर नामों का काटा जाना 2027 के विधानसभा चुनावों के परिणामों को पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के पास अब इतना समय नहीं है कि वह इसे सुधार सके, इसलिए सबसे उचित विकल्प यही है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द कर दिया जाए।
आम आदमी पार्टी ने भी उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी यानी आप ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है। आप का कहना है कि SIR प्रक्रिया ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले चुनाव अधिकारियों के अधिकारों को कमजोर किया है। आप गोवा के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले राज्य की जमीनें छीनी जा रही थीं और अब लोकतंत्र के आधार यानी वोट छीनने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गोवा तक सीमित नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। पार्टी का मानना है कि जो वोटर बीजेपी के पक्ष में नहीं हैं, उन्हें निशाना बनाकर उनके नाम सूची से हटाए जा रहे हैं ताकि चुनाव परिणामों को प्रभावित किया जा सके।
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