UPI लेनदेन पर बड़ा अपडेट: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा MDR का बोझ, बैंकों को मिली सतर्क रहने की अहम जिम्मेदारी व्यापार एक घंटा पहले 4
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले MDR शुल्क का भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा। बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बदलाव को लेकर लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।

बैंकों को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी

देश में 15 अक्टूबर से यूपीआई भुगतान प्रणाली में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है, जिसे लेकर आम ग्राहकों और दुकानदारों के मन में कई तरह की उलझनें बनी हुई हैं। यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लागू होने की खबरों के बीच सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का जिम्मा बैंकों पर छोड़ दिया है कि इस नए बदलाव का कोई भी अनावश्यक बोझ आम ग्राहकों पर न पड़े। इस दिशा में कदम उठाते हुए बैंक अब व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी में हैं ताकि ग्राहकों को पूरी प्रक्रिया की सही जानकारी मिल सके।

सरकार के खाते में नहीं जाएगा एक भी पैसा

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एमडीआर यानी मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट से प्राप्त होने वाली राशि में से सरकार के खजाने में एक भी पैसा नहीं जाएगा। स्पष्ट किया गया है कि इस शुल्क से एकत्र की गई पूरी धनराशि का वितरण यूपीआई से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के बीच किया जाएगा। एमडीआर के तहत प्राप्त राशि का बंटवारा इस तरह तय किया गया है: कुल राशि का 40 फीसदी हिस्सा ग्राहक के बैंक को, 30 फीसदी भुगतान सेवा प्रदाता को, 20 फीसदी यूपीआई ऐप को और शेष 10 फीसदी राशि यूपीआई ऐप के प्रायोजक बैंक को प्राप्त होगी। सरकार ने साफ शब्दों में कहा है कि एमडीआर न तो कोई कर है, न ही उपकर और न ही कोई सेस।

MDR शुल्क का गणित और नियम

सरकार ने 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 फीसदी एमडीआर लागू करने का निर्णय लिया है। हालांकि, इसे लेकर कई सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं। भुगतान की अधिकतम सीमा तय करते हुए सरकार ने कहा है कि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेनदेन और अन्य छोटे भुगतान को इस शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

96 फीसदी छोटे कारोबारियों को राहत

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस बदलाव का असर बहुत सीमित दायरे में रहेगा। जो छोटे कारोबारी यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से महीने में 1 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त करते हैं, उन्हें इस नए शुल्क से पूरी तरह छूट दी गई है। आंकड़ों के अनुसार, देश के करीब 96 फीसदी कारोबारी लेनदेन इस नियम के लागू होने के बाद भी पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे।

विशेष सेवाओं के लिए अलग नियम

कुछ विशिष्ट क्षेत्रों के लिए शुल्क संरचना को अलग रखा गया है। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं के लिए यदि लेनदेन 2,000 रुपये से अधिक का होता है, तो उस पर 5 रुपये का तय शुल्क लागू होगा। इसके अलावा, पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन जैसे कि म्यूचुअल फंड और शेयरों की खरीद-बिक्री के मामले में 0.02 फीसदी शुल्क का प्रावधान किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये ही रहेगी।

अफवाहों पर लगाम और भविष्य की उम्मीद

बाजार में ऐसी आशंकाएं जताई जा रही थीं कि एमडीआर लगने से उपभोक्ता फिर से नकदी की ओर रुख कर सकते हैं, लेकिन सरकार ने इसे खारिज करते हुए गलत बताया है। भारतीय बैंक संघ यानी आईबीए जल्द ही एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाएगा ताकि 0.4 प्रतिशत एमडीआर को लेकर फैली अफवाहों का खंडन किया जा सके। साथ ही, ऐसी उम्मीद भी जताई गई है कि जीएसटी परिषद भविष्य में व्यापारियों पर लगने वाले एमडीआर शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी के विषय पर विचार करेगी, जैसा कि पूर्व में बीमा प्रीमियम के मामले में किया गया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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