बिहार
एक घंटा पहले
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खेती की लगातार बढ़ती लागत किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हो गई है। खासकर खाद और उर्वरकों के दाम जिस तेजी से चढ़ रहे हैं, उसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है। ऐसे हालात में कृषि वैज्ञानिक किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने और जरूरत के मुताबिक ही खाद डालने की सलाह दे रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), मुंगेर के विशेषज्ञों का मानना है कि मिट्टी की जांच करवाकर किसान न सिर्फ अपनी लागत घटा सकते हैं, बल्कि पैदावार भी बढ़ा सकते हैं।
महज 110 रुपये में खेत की पूरी सेहत का ब्योरा
एक ओर सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है, वहीं दूसरी ओर कृषि विशेषज्ञ भी वैज्ञानिक खेती अपनाने पर जोर दे रहे हैं। मुंगेर कृषि विज्ञान केंद्र के जानकारों के अनुसार यदि किसान फसल बोने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच करा लें, तो खाद और उर्वरकों पर होने वाला गैर-जरूरी खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है। सिर्फ 110 रुपये में होने वाली यह मिट्टी जांच किसानों को उनके खेत की पूरी सेहत की जानकारी देती है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
क्यों जरूरी है बुवाई से पहले मिट्टी की जांच
कृषि विज्ञान केंद्र, मुंगेर के मिट्टी जांच विशेषज्ञ प्रहलाद कुमार ने बताया कि किसानों को खेती शुरू करने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए। इस जांच से यह स्पष्ट हो जाता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं और किन तत्वों की कमी है। इसी आधार पर सॉयल हेल्थ कार्ड तैयार किया जाता है, जिसके मुताबिक किसानों को उर्वरकों और पोषक तत्वों के संतुलित इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।
उन्होंने बताया कि कई किसान बिना मिट्टी की जांच कराए ही डीएपी, यूरिया और दूसरे उर्वरकों का अधिक मात्रा में प्रयोग कर देते हैं, जबकि कई बार खेत को उनकी जरूरत ही नहीं होती। इससे एक तरफ खेती की लागत बढ़ती है और दूसरी तरफ मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है। जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान सिर्फ जरूरी मात्रा में ही खाद का इस्तेमाल करते हैं, जिससे खर्च घटता है और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।
सही नमूना कैसे लें किसान
विशेषज्ञों के मुताबिक मिट्टी जांच के लिए सही तरीके से नमूना लेना बेहद अहम है। किसान एक पॉलिथीन बैग और खुरपी या कुदाल की मदद से खेत के चारों कोनों और बीच के हिस्से से मिट्टी का नमूना जुटा सकते हैं। इसके लिए खेत की मेड़ से करीब दो फीट अंदर जाकर अंग्रेजी के ‘V’ आकार का गड्ढा बनाना होता है और उसकी दीवार से लगभग छह इंच मोटी मिट्टी की परत निकालनी होती है।
पांचों जगहों से ली गई मिट्टी को एक स्थान पर एकत्र कर अच्छी तरह मिला लिया जाता है। इसके बाद ‘रोटी विधि’ अपनाते हुए मिट्टी को चार बराबर भागों में बांटा जाता है। फिर दो विपरीत भागों को अलग कर बची हुई मिट्टी को दोबारा मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया को दोहराने के बाद करीब आधा किलो प्रतिनिधि मिट्टी का नमूना तैयार हो जाता है, जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाता है।
7 से 8 दिन में तैयार होता है सॉयल हेल्थ कार्ड
नमूना जमा करते समय किसान को अपना नाम, पता, खेत का विवरण, पिछली फसल और अगली प्रस्तावित फसल की जानकारी भी देनी होती है। कृषि विज्ञान केंद्र की प्रयोगशाला में नमूना जमा होने के बाद लगभग सात से आठ दिनों के भीतर सॉयल हेल्थ कार्ड तैयार कर दिया जाता है। इस रिपोर्ट में खेत की मिट्टी में मौजूद सभी प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति का विस्तृत ब्योरा रहता है।
रिपोर्ट देखकर किसान आसानी से तय कर सकते हैं कि उन्हें कौन-सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है। इससे अनावश्यक खर्च बचता है, मिट्टी की गुणवत्ता बरकरार रहती है और खेती पहले से अधिक लाभदायक बन जाती है।
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