मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को 1 रुपये प्रति एकड़ पर जमीन देने पर सियासी घमासान, आरजेडी ने उठाए सवाल बिहार एक महीने पहले 69
बिहार के मुंगेर में ईशा फाउंडेशन को 99 साल की लीज पर 15 एकड़ जमीन देने के सरकारी फैसले ने राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रीय जनता दल ने इस कदम को सार्वजनिक संपत्ति का निजीकरण करार देते हुए कड़े सवाल खड़े किए हैं।

मुंगेर में सरकारी जमीन का आवंटन और उपजा विवाद

बिहार के मुंगेर जिले के तेलडीहा इलाके में ईशा फाउंडेशन को दी गई जमीन को लेकर राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। बिहार सरकार ने यहाँ करीब 15 एकड़ जमीन 99 साल की लंबी अवधि के लिए लीज पर देने का निर्णय लिया है। इस सौदे की सबसे चर्चित बात यह है कि यह जमीन मात्र 1 रुपये प्रति एकड़ की प्रतीकात्मक सालाना दर पर दी गई है। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सरकार पर चौतरफा हमला बोल दिया है। आरजेडी ने सीधे तौर पर राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और इसे सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने का एक गलत प्रयास बताया है।

आरजेडी के तीखे सवाल और आपत्तियां

राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं। पार्टी का कहना है कि जिस जमीन को हासिल करने के लिए सरकार ने जनता के करों का करोड़ों रुपया खर्च करके अधिग्रहण किया था, उसे इतनी कम दर पर एक निजी संस्था को देने का औचित्य क्या है? आरजेडी नेताओं का तर्क है कि बिहार जैसे घनी आबादी वाले और भूमि संसाधनों की कमी वाले राज्य में, इस तरह के फैसले बिना किसी सार्वजनिक चर्चा या परामर्श के लिए जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पार्टी ने इसे सरकारी संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता की भारी कमी का मामला बताया है।

योग और पर्यटन पर केंद्रित बहस

सरकार की ओर से इस निर्णय के बचाव में तर्क दिया गया है कि ईशा फाउंडेशन की प्रस्तावित परियोजना से मुंगेर में पर्यटन, योग संस्कृति और आध्यात्मिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे स्थानीय विकास को गति मिलेगी। हालांकि, आरजेडी ने इस तर्क को खारिज करते हुए मुंगेर के गौरवशाली इतिहास और बिहार योग विद्यालय का उदाहरण दिया है। पार्टी का कहना है कि मुंगेर पहले से ही दुनिया भर में योग के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना चुका है और यहाँ बिहार योग विद्यालय जैसा प्रतिष्ठित संस्थान पहले से मौजूद है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार का उद्देश्य वास्तव में योग को बढ़ावा देना है, या फिर यह कोई राजनीतिक कदम है? आरजेडी ने पूछा है कि सरकार ने स्थानीय विरासत को और मजबूत करने के बजाय बाहर की निजी संस्था को प्राथमिकता क्यों दी?

राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप

बिहार की सत्ताधारी भाजपा और जदयू गठबंधन पर निशाना साधते हुए आरजेडी ने आरोप लगाया है कि राज्य के कीमती संसाधनों का हस्तांतरण निजी संस्थाओं के पक्ष में किया जा रहा है। विपक्षी दल इसे बिहार के संसाधनों के साथ खिलवाड़ करार दे रहा है। आरजेडी ने मांग की है कि सरकार को इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा गया है कि यह परियोजना जनहित में है और इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल, यह मुद्दा बिहार की राजनीति में गरमा गया है और दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी का दौर लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहरा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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