बिहार
एक घंटा पहले
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विचारों
हावड़ा से निकली आस्था की अनोखी यात्रा
बिहार के मुंगेर जिले में इन दिनों श्रावणी मेले की धूम मची है। कांवरिया पथ पर आस्था के ऐसे कई रंग देखने को मिल रहे हैं, जो न केवल श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं, बल्कि लोगों का ध्यान भी अपनी ओर खींच रहे हैं। इसी क्रम में असरगंज के कच्ची कांवरिया पथ पर एक अत्यंत अलौकिक दृश्य दिखाई दिया। पश्चिम बंगाल के हावड़ा से लगभग 50 कांवरियों का एक जत्था अपने साथ एक विशेष कांवर लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकला है। इस कांवर में भगवान शिव और माता पार्वती का अद्भुत स्वरूप दर्शाया गया है।
10 दिनों की कड़ी मेहनत और श्रद्धा का संगम
यह कोई साधारण कांवर नहीं है, बल्कि इसे तैयार करने में कारीगरों और कांवरियों ने अपनी पूरी निष्ठा समर्पित की है। इस विशेष कांवर का कुल वजन लगभग 120 किलो है। इसे बनाने की प्रक्रिया में कुल 10 दिन का समय लगा है। कांवर को तैयार करने वाली टीम ने इसमें महादेव के शांत चेहरे और माता पार्वती के प्रेमपूर्ण एवं वात्सल्यमयी भावों को बड़ी बारीकी से उकेरा है। दोनों मूर्तियों के गले में सुंदर फूलों की मालाएं सजाई गई हैं, जो उन्हें और अधिक जीवंत बनाती हैं। कांवरियों के अनुसार, यह निर्माण केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि उनकी अटूट भक्ति का प्रतीक है।
श्रद्धालुओं का लगा तांता
जैसे ही यह कांवर असरगंज के मार्ग से गुजरी, वहां मौजूद लोगों की भीड़ इसे देखने के लिए रुक गई। जो श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे, उन्होंने भी अपने कदम रोक लिए और इस अलौकिक स्वरूप को निहारने लगे। कई भक्त भावविभोर होकर हाथ जोड़कर महादेव और माता पार्वती को प्रणाम करते हुए नजर आए। उत्साह का आलम यह था कि लोग अपने मोबाइल फोन निकालकर इस सुंदर कांवर की तस्वीरें लेने और वीडियो बनाने में व्यस्त हो गए। कांवरिया पथ पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
कंधों पर भक्ति का भार
इस 120 किलो वजनी कांवर को उठाने का जिम्मा चार कांवरिए मिलकर संभालते हैं। लंबी और कठिन यात्रा होने के बावजूद उनके चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं है। वे पूर्ण ऊर्जा और उत्साह के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह दृश्य बताता है कि जब हृदय में असीम भक्ति और अटूट विश्वास हो, तो शारीरिक कष्ट भी गौण हो जाते हैं। कांवरियों का यह जत्था साबित कर रहा है कि भारी बोझ भी ईश्वर की सेवा के लिए उठाया जाए तो वह हल्का महसूस होने लगता है।
आस्था के सामने कठिन राहें भी आसान
श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों द्वारा अलग-अलग प्रकार की कांवर लाना परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन शिव और शक्ति के इस विशेष स्वरूप वाली कांवर ने सभी का दिल जीत लिया है। कांवरियों का कहना है कि बाबा की कृपा से ही वे इतनी भारी कांवर को लेकर मीलों का सफर तय कर पा रहे हैं। उनके इस समर्पण ने अन्य कांवरियों और भक्तों के लिए प्रेरणा का कार्य किया है। श्रावणी मेले के इस पड़ाव पर शिव-पार्वती के इस स्वरूप ने न केवल भक्ति का माहौल बनाया है, बल्कि आस्था के रंग को और भी गहरा कर दिया है। श्रद्धालु बड़ी उत्सुकता के साथ उनकी यात्रा को सफल बनाने के लिए शुभकामनाएं भी दे रहे हैं।
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